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301
NIOS Senior Secondary 100% Curricular Audit Verified

हिन्दी / Hindi (301)

अधिकृत परीक्षा समाधान • प्रामाणिक आदर्श उत्तर-पुस्तिका

हिन्दी / Hindi (301)
सम्पूर्ण हल प्रश्न-पत्र (Complete Solved Paper)

एन.आई.ओ.एस. (NIOS) उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम के अनुरूप शत-प्रतिशत प्रामाणिक समाधान। कुल 34 प्रश्नों के साथ सभी वैकल्पिक प्रश्नों (OR Options), सप्रसंग व्याख्या, कार्यालयी टिप्पण, पत्र-लेखन, व्यावहारिक व्याकरण तथा न्यू मीडिया एवं टंकण का पूर्ण विश्लेषणात्मक हल।

समय: 3 घण्टे पूर्णांक: 100 कुल प्रश्न: 34 Formatting & NIOS-structure Reviewed
100/100 Scoring Target 34 Questions
20 MCQs
10 व्याकरण (Q25)
काव्यांश व गद्यांश
पत्र व टिप्पण

सामान्य अनुदेश एवं परीक्षा निर्देश (General Examination Instructions)

निर्देश तथा अंक-विभाजन योजना देखने हेतु क्लिक करें

सामान्य अनुदेश (Instructions for Candidates) :

  1. परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के पहले पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अवश्य लिखें।
  2. कृपया प्रश्न-पत्र को जाँच लें कि प्रश्न-पत्र के कुल पृष्ठों (11) तथा प्रश्नों (34) की उतनी ही संख्या है जितनी प्रथम पृष्ठ के सबसे ऊपर छपी है। इस बात की जाँच भी कर लें कि प्रश्न क्रमिक रूप में हैं।
  3. उत्तर-पुस्तिका में पहचान-चिह्न बनाने अथवा निर्दिष्ट स्थानों के अतिरिक्त कहीं भी अनुक्रमांक लिखने पर परीक्षार्थी को अयोग्य ठहराया जायेगा।
  4. अपनी उत्तर-पुस्तिका पर प्रश्न-पत्र का कोड संख्या 71/SS/301, सेट A1 लिखें।
अंक-विभाजन योजना (Marking Scheme)
  • • खंड - क (प्रश्न 1 से 20): बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक = 20 अंक)
  • • खंड - ख (प्रश्न 21 से 25): वस्तुनिष्ठ प्रश्न (3+3+7+7+10 = 30 अंक)
  • • खंड - ग (प्रश्न 26 से 34): वर्णनात्मक प्रश्न (लघूत्तरीय-1: 4×2, लघूत्तरीय-2: 5×2, दीर्घउत्तरीय-1: 6×4, दीर्घउत्तरीय-2: 8×1 = 50 अंक)
  • • कुल पूर्णांक: 100 अंक | सभी 34 प्रश्न अनिवार्य हैं।
समय सारिणी एवं निर्देश

प्रश्न-पत्र पठन अवधि: 15 मिनट (दोपहर 02:15 बजे से 02:30 बजे तक केवल प्रश्न-पत्र पढ़ने हेतु)।
लेखन अवधि: 3 घण्टे (दोपहर 02:30 बजे से 05:30 बजे तक दी गई उत्तर-पुस्तिका में लिखने हेतु)।

खंड - क

बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रश्न संख्या 1 से 20)

[1 × 20 = 20 अंक]
Q. 01 काव्य खंड • भरत का भ्रातृ प्रेम (तुलसीदास)
[1 अंक]

भरत जब राम से मिलने जाते हैं तो उस प्रसंग का शीर्षक आपकी पाठ्यपुस्तक में क्या दिया गया है ?

(क) भरत राम संवाद
(ख) भरत - सा भाई
(ग) भरत का भ्रातृ प्रेम
(घ) भरत और राम
प्रमाणित उत्तर • विकल्प (ग) Reviewed

Ans. (ग) भरत का भ्रातृ प्रेम
औचित्य / स्पष्टीकरण : एन.आई.ओ.एस. उच्चतर माध्यमिक हिन्दी (301) पाठ्यक्रम के पाठ 2 में गोस्वामी तुलसीदास विरचित ‘रामचरितमानस’ (अयोध्याकांड) से संकलित इस प्रसंग का अधिकृत शीर्षक ‘भरत का भ्रातृ प्रेम’ दिया गया है, जिसमें भरत के निष्काम और अनुपम भ्रातृ-प्रेम का मार्मिक चित्रण है।

Q. 02 काव्य खंड • भरत का भ्रातृ प्रेम
[1 अंक]

भरत के अनुसार विधाता क्या सहन नहीं कर पाया ?

(क) राम और भरत के बीच गहरे प्रेम भाव को
(ख) कौशल्या और राम के बीच गहरे प्रेम को
(ग) अयोध्या नगरी की सुख-समृद्धि को
(घ) कैकेयी के षड्यंत्र को
प्रमाणित उत्तर • विकल्प (क)

Ans. (क) राम और भरत के बीच गहरे प्रेम भाव को
औचित्य / स्पष्टीकरण : भरत जी कहते हैं—“विधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिसु पारा॥” अर्थात् विधाता मेरे और प्रभु श्री राम के अगाध और निष्कलंक प्रेम को सहन नहीं कर सका और उसने मेरी नीच माता कैकेयी के बहाने हमारे बीच अलगाव पैदा कर दिया।

Q. 03 काव्य खंड • रामचरितमानस (अयोध्याकांड)
[1 अंक]

‘राम ने कभी भी भरत का दिल नहीं दुखाया’ – इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है -

(क) खेलत खुनिस न कबहुँ देखी
(ख) हारेहुँ खेल जिता वहि मोही
(ग) मो पर कृपा सनेहु बिसोखी
(घ) कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगु
प्रमाणित उत्तर • विकल्प (घ)

Ans. (घ) कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगु
औचित्य / स्पष्टीकरण : मानस की चौपाई में भरत जी कहते हैं—“कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगु” जिसका सीधा और सटीक अर्थ है कि प्रभु श्री राम ने बाल्यकाल से लेकर आज तक कभी भी मेरा मन नहीं तोड़ा अथवा मेरा दिल नहीं दुखाया।

Q. 04 काव्य खंड • सूरदास के पद (बाल-लीला)
[1 अंक]

सूरदास द्वारा रचित ‘पद’ के आधार पर कॉलम-1 और कॉलम-2 को सुमेलित कीजिए और उचित विकल्प छाँटकर लिखिए :

कॉलम – 1 कॉलम – 2
1 कर(i) रेनु
2 कंठ(ii) नवनीत
3 तन(iii) कड़ला
(क) (1 - ii), (2 - iii), (3 - i)
(ख) (1 - ii), (2 - i), (3 - iii)
(ग) (1 - iii), (2 - i), (3 - ii)
(घ) (1 - i), (2 - iii), (3 - ii)
प्रमाणित उत्तर • विकल्प (क)

Ans. (क) (1 - ii), (2 - iii), (3 - i)
औचित्य / स्पष्टीकरण : सूरदास के पद “सोभित कर नवनीत लिए। घुटुरनि चलत रेनु तन-मंडित... कटुला-कंठ...” के अनुसार कर (हाथ) में नवनीत (मक्खन) है (1-ii), कंठ (गले) में कड़ला/कटुला माला सुशोभित है (2-iii), तथा तन (शरीर) रेनु (धूलि) से मंडित है (3-i)।

Q. 05 काव्य खंड • रस निष्पत्ति
[1 अंक]

सूरदास द्वारा रचित पद में प्रधानता है -

(क) शृंगार रस की
(ख) वात्सल्य रस की
(ग) भक्ति रस की
(घ) करुण रस की
Ans. (ख) वात्सल्य रस की

स्पष्टीकरण : बालक कृष्ण के घुटनों के बल चलने, हाथों में माखन लिए मुख पर दही का लेप लगाए बाल-सुलभ चेष्टाओं का अनूठा चित्रण होने के कारण इस पद में विशुद्ध ‘वात्सल्य रस’ की अप्रतिम प्रधानता है। सूरदास को वात्सल्य रस का सम्राट माना जाता है।

Q. 06 काव्य खंड • बिहारी के दोहे
[1 अंक]

बिहारी रचित दोहे के अनुसार श्रीकृष्ण को __________ लग गई है।

(क) दुनियादारी की हवा
(ख) गायें चराने की लत
(ग) विश्राम की आदत
(घ) भक्तों को दर्शन देने की चाहत
Ans. (क) दुनियादारी की हवा

स्पष्टीकरण : भक्त कवि बिहारी अपने भक्ति-परक दोहे में उलाहना देते हुए प्रभु से कहते हैं कि हे हरि! ऐसा प्रतीत होता है कि अब आपको भी सांसारिक रीति अर्थात् दुनियादारी की हवा लग गई है, इसीलिए आप मुझ जैसे दीन-हीन भक्त की पुकार सुनकर भी उसकी उपेक्षा कर रहे हैं।

Q. 07 काव्य खंड • परशुराम के उपदेश (दिनकर)
[1 अंक]

‘परशुराम के उपदेश’ कविता कब लिखी गई ?

(क) भारत पर पाकिस्तान के आक्रमण के बाद
(ख) भारत पर चीन के आक्रमण के बाद
(ग) कौरवों और पाण्डवों के युद्ध के समय
(घ) अर्जुन द्वारा कुरुक्षेत्र में युद्ध न लड़ने के निर्णय के बाद
Ans. (ख) भारत पर चीन के आक्रमण के बाद

स्पष्टीकरण : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने अपनी प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ (जिसका अंश ‘परशुराम के उपदेश’ नाम से संकलित है) की रचना सन् 1962 में भारत पर चीनी आक्रमण के पश्चात् देश में पौरुष, शौर्य, आत्मरक्षा और यथार्थवादी सैन्य चेतना जाग्रत करने के उद्देश्य से की थी।

Q. 08 काव्य खंड • हरिवंशराय बच्चन
[1 अंक]

‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ कविता का कवि स्वयं को किसके बंधन में पाता है ?

(क) अतीत की स्मृतियों के
(ख) असमंजसता के
(ग) आत्मग्लानि के
(घ) रूढ़ियों और परंपरा के
Ans. (क) अतीत की स्मृतियों के

स्पष्टीकरण : कवि हरिवंशराय बच्चन जीवन के हर्ष-विषाद, सुख-दुःख और आत्मीय जनों के बिछोह की अनगिनत बीती हुई घटनाओं अर्थात् ‘अतीत की स्मृतियों’ के मोहक और मार्मिक बंधन में स्वयं को घिरा हुआ पाते हैं।

Q. 09 गद्य खंड • पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ (परसाई)
[1 अंक]

‘पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ’ पाठ में वयोवृद्ध कानों में सुनने का यंत्र लगाकर क्यों बैठते थे ?

(क) बाहर के शोर से बचने के लिए
(ख) बच्चों की आवाज़ से बचने के लिए
(ग) संगीत सभा का आनंद लेने के लिए
(घ) फिल्मी गीतों को सुनने के लिए
Ans. (क) बाहर के शोर से बचने के लिए

स्पष्टीकरण : हरिशंकर परसाई के व्यंग्य पाठ में वयोवृद्ध कान में सुनने की मशीन इसलिए लगाते थे ताकि जब वे चाहें उसे बंद करके दुनिया के व्यर्थ प्रपंचों और बाहर के अप्रिय शोर-शराबे से बच सकें तथा अपनी आत्मीय शांति पा सकें।

Q. 10 गद्य खंड • चीफ की दावत (भीष्म साहनी)
[1 अंक]

‘चीफ की दावत’ कहानी में शामनाथ को ‘मिस्टर शामनाथ’ कहकर क्यों संबोधित किया गया है ?

(क) वह कहानी का प्रमुख पात्र है।
(ख) उसमें आधुनिक बनने की लालसा है।
(ग) उच्च शिक्षा प्राप्त अधिकारी है।
(घ) संवेदनहीन और नीरस व्यक्ति है।
Ans. (ख) उसमें आधुनिक बनने की लालसा है।

स्पष्टीकरण : कथाकार भीष्म साहनी ने शामनाथ के चरित्र में पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण, प्रदर्शनप्रियता, कृत्रिमता और साहब बनने की अंधी लालसा को उजागर करने के लिए ही व्यंग्यात्मक रूप से उसे ‘मिस्टर शामनाथ’ नाम से संबोधित किया है।

Q. 11 गद्य खंड • चीफ की दावत
[1 अंक]

‘चीफ की दावत’ कहानी में शामनाथ द्वारा माँ को खाने-पीने, उठने-बैठने आदि के लिए दिए गए निर्देशों द्वारा पता चलता है कि -

(क) अपनी माँ का पूरी तरह से देखभाल करता था।
(ख) उसमें मानवीय संस्कार और भावनाएँ लुप्त हो गई थीं।
(ग) वह घर में अपनी इच्छानुसार ही कार्य करवाता था।
(घ) वह माँ का खूब आदर - सम्मान करता था।
Ans. (ख) उसमें मानवीय संस्कार और भावनाएँ लुप्त हो गई थीं।

स्पष्टीकरण : शामनाथ अपनी बूढ़ी, अनपढ़ माँ को घर की पुरानी फालतू वस्तु मानकर चीफ की नजरों से छिपाने और दावत में बैठने-उठने का ढोंग रचने के निर्देश देता है, जिससे स्पष्ट होता है कि स्वार्थ और झूठे दिखावे के कारण उसके अंदर से मानवीय संस्कार व मातृ-प्रेम लुप्त हो चुके थे।

Q. 12 गद्य खंड • पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ
[1 अंक]

‘पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ’ पाठ में वृद्धों के अनुसार तरुणों ने उन्हें वंचित किया -

(क) उनके अधिकारों से
(ख) भोज्य पदार्थों से
(ग) घूमने-फिरने से
(घ) धन-संपत्ति से
Ans. (क) उनके अधिकारों से

स्पष्टीकरण : व्यंग्यकार के अनुसार पुरानी पीढ़ी के वृद्धों का यह निरंतर आक्षेप रहता है कि नई पीढ़ी के तरुणों ने उन्हें समाज और परिवार में निर्णय लेने, सम्मान पाने और नेतृत्व करने के उनके मौलिक ‘अधिकारों’ से वंचित कर दिया है।

Q. 13 गद्य खंड • पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ
[1 अंक]

‘पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ’ पाठ में वयोवृद्ध साहित्यकारों द्वारा अपनाए गए कृत्रिम उपायों का वर्णन क्यों किया गया है ?

(क) उनकी शारीरिक दुर्बलता को दिखाने के लिए
(ख) विज्ञान तथा तकनीक का प्रभाव दिखाने के लिए
(ग) उनके जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करने के लिए
(घ) उनकी कठिन जिजीविषा का उल्लेख करने के लिए
Ans. (घ) उनकी कठिन जिजीविषा का उल्लेख करने के लिए

स्पष्टीकरण : वृद्ध साहित्यकारों द्वारा नकली बत्तीसी, श्रवण यंत्र आदि कृत्रिम साधनों के सहारे निरंतर सक्रिय रहने का वर्णन लेखक ने उनके जीवन के प्रति अगाध मोह तथा हर हाल में जीवित व प्रासंगिक बने रहने की ‘कठिन जिजीविषा’ को रेखांकित करने के लिए किया है।

Q. 14 संस्मरण • सुभद्रा (महादेवी वर्मा)
[1 अंक]

सुभद्रा कुमारी चौहान की उग्रता का अंतिम परिचय कब प्राप्त होता है ?

(क) उनकी पुत्री के विवाह के समय
(ख) पति की जेल - यात्रा के समय
(ग) कविता - लेखन कर्म के पकड़े जाने के दिन
(घ) विश्वेश्वर बाबू के अस्थि विसर्जन के दिन
Ans. (घ) विश्वेश्वर बाबू के अस्थि विसर्जन के दिन

स्पष्टीकरण : महादेवी वर्मा रचित संस्मरण ‘सुभद्रा’ के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानी विश्वेश्वर बाबू के निधनोपरांत जब उनकी अस्थियों का विसर्जन किया जा रहा था, तब सुभद्रा जी के भीतर की प्रखर देशभक्ति और राष्ट्रीय उग्रता का अंतिम तेजस्वी परिचय मिला था।

Q. 15 संस्मरण • सुभद्रा
[1 अंक]

सुभद्रा कुमारी द्वारा अपनी पुत्री का विवाह गैर जाति के वर से करना दिखाता है कि वह -

(क) विचारों से आधुनिक थी
(ख) उदार चेतना वाली थी
(ग) सहज और सरल थी
(घ) दृढ़ इच्छा शक्ति की महिला थी
Ans. (क) विचारों से आधुनिक थी

स्पष्टीकरण : तत्कालीन रूढ़िग्रस्त युग में अपनी पुत्री सुधा का विवाह गैर-जाति के वर (मुंशी प्रेमचंद के सुपुत्र अमृतराय) के साथ बिना किसी दहेज व पाखंड के संपन्न कराना यह प्रमाणित करता है कि वे संकीर्ण जाति-व्यवस्था से ऊपर उठकर प्रगतिशील व आधुनिक विचारों की पक्षधर थीं।

Q. 16 हिंदी साहित्येतिहास • कवयित्री पहचान
[1 अंक]

किसकी गणना कवयित्रियों में नहीं होती ?

(क) महादेवी वर्मा
(ख) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) सुमित्रा कुमारी सिन्हा
Ans. (ग) सुमित्रानंदन पंत

स्पष्टीकरण : सुमित्रानंदन पंत छायावाद के प्रमुख पुरुष कवि हैं, जबकि महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान और सुमित्रा कुमारी सिन्हा तीनों ही ख्यातिनाम महिला साहित्यकार (कवयित्रियाँ) हैं।

Q. 17 यात्रा-संस्मरण • अंडमान डायरी
[1 अंक]

‘अंडमान डायरी’ के आधार पर लिखिए कि फाँसीघर के सामने की कारा की दूसरी मंजिल की सबसे अंतिम कोठरी किसकी थी ?

(क) वीर सावरकर की
(ख) सावरकर के भाई की
(ग) अंग्रेज़ अफसर की
(घ) फाँसी दी जानेवाली कैदी की
Ans. (क) वीर सावरकर की

स्पष्टीकरण : सेल्यूलर जेल पोर्ट ब्लेयर (अंडमान) में ब्रिटिश हुकूमत ने अमानवीय यातना देने के उद्देश्य से फाँसीघर के ठीक सामने स्थित खंड की दूसरी मंजिल की अंतिम एकांत कोठरी स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को दी थी।

Q. 18 यात्रा-संस्मरण • अंडमान डायरी
[1 अंक]

‘अंडमान डायरी’ में ‘चिड़ियाँ’ प्रतीकार्थ है -

(क) स्वतंत्रता का
(ख) स्वतंत्रता सेनानियों की
(ग) मृत-आत्माओं की
(घ) आकाश में उड़ते पक्षियों की
Ans. (क) स्वतंत्रता का

स्पष्टीकरण : काल-कोठरी की लोहे की सलाखों के पार उन्मुक्त आकाश में उड़ती चिड़ियों का उल्लेख स्वतंत्रता, असीम मुक्ति तथा मानवीय आत्मा की स्वाधीन चेतना के प्रतीक रूप में किया गया है।

Q. 19 प्रयोजनमूलक हिंदी • कार्यालयी पत्राचार
[1 अंक]

अर्द्ध सरकारी पत्रों में नहीं होता -

(क) संबोधन
(ख) धन्यवाद ज्ञापन
(ग) स्व - निर्देश
(घ) पृष्ठांकन
Ans. (घ) पृष्ठांकन

स्पष्टीकरण : अर्द्ध-सरकारी पत्र (D.O. Letter) व्यक्तिगत व अनौपचारिक स्तर पर कार्य में गति लाने हेतु भेजा जाता है। यह व्यक्तिगत संवाद होने के कारण इसमें सरकारी पत्रों की तरह अन्य विभागों को दी जाने वाली प्रतियों का ‘पृष्ठांकन’ (Endorsement) नहीं किया जाता।

Q. 20 प्रयोजनमूलक हिंदी • कार्यालयी संवाद
[1 अंक]

कार्यालयों के संवाद __________ के माध्यम से होता है।

(क) परिपत्र
(ख) सरकारी पत्र
(ग) टिप्पण
(घ) अर्द्ध सरकारी पत्र
Ans. (ख) सरकारी पत्र

स्पष्टीकरण : दो या दो से अधिक विभिन्न सरकारी कार्यालयों, मंत्रालयों अथवा अधीनस्थ विभागों के मध्य वैधानिक, औपचारिक एवं आधिकारिक संवाद का मुख्य माध्यम ‘सरकारी पत्र’ (Official Letter) ही होता है।

खंड - ख

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (प्रश्न संख्या 21 से 25)

[कुल अंक : 30]
Q. 21 [1 × 3 = 3 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही / गलत में लिखिए :
(i) प्रारूप तैयार करते समय पत्राचार के विभिन्न रूपों की जानकारी आवश्यक है।
(ii) सारे अखबारों के ई-पेपर इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध हैं।
(iii) विज्ञापन के माध्यम से लोगों का मनोरंजन होता है।

उत्तर एवं स्पष्टीकरण :
  • (i) प्रारूप तैयार करते समय पत्राचार के विभिन्न रूपों की जानकारी आवश्यक है।  — सही
    (सरकारी पत्र, अर्द्ध-सरकारी पत्र, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र आदि की नियमावली व संरचना जाने बिना शुद्ध प्रारूपण संभव नहीं है।)
  • (ii) सारे अखबारों के ई-पेपर इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध हैं।  — गलत
    (अनेक प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार-पत्रों के डिजिटल ई-संस्करण सशुल्क अथवा प्रीमियम सदस्यता पर ही उपलब्ध होते हैं।)
  • (iii) विज्ञापन के माध्यम से लोगों का मनोरंजन होता है।  — गलत
    (विज्ञापन का प्राथमिक उद्देश्य उत्पाद या सेवा की जानकारी देकर उपभोक्ता को क्रय हेतु प्रेरित करना है; मनोरंजन केवल एक माध्यम मात्र है, मुख्य लक्ष्य नहीं।)
Q. 22 [1 × 3 = 3 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में लिखिए :
(i) अंडमान द्वीप समूह का मुख्यालय कहाँ स्थित है ?
(ii) ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस कुप्रथा की ओर संकेत किया गया है ?
(iii) ‘चीफ की दावत’ पाठ किस साहित्यिक विधा में लिखा गया है ?

  • (i) अंडमान द्वीप समूह का प्रशासनिक मुख्यालय पोर्ट ब्लेयर (Port Blair) में स्थित है।
  • (ii) ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में दहेज प्रथा, कन्या की वस्तु की तरह नुमाइश करने तथा स्त्री-शिक्षा के प्रति संकीर्ण दकियानूसी मानसिकता रूपी सामाजिक कुप्रथा की ओर संकेत किया गया है।
  • (iii) ‘चीफ की दावत’ पाठ गद्य साहित्य की कहानी विधा के अंतर्गत लिखा गया है।
Q. 23 (काव्यांश आधारित) [1 × 7 = 7 अंक]
माई री म्हाँ लियो गोविन्दो मोल।
ये कह्या छाणे म्हाँ कहाँ चौंदड़े, लियो बजंता ढोल।
ये कहा मुँहपो म्हाँ कहाँ सस्तो, लिया री तराजू तौल।
तण वारा म्हाँ जीवण वारो, वारो अमोलक मोल।
मीरो कुं प्रभु दरसण दीज्यो, पूरब जनम को कोल।।

(i) ‘लिया री तराजू तौल’ से क्या आशय है ?

(क) सोच-समझकर निर्णय लेना | (ख) तराजू से तौल कर लेना | (ग) गुण-अवगुण देखना | (घ) छाँटकर चुनना

(ii) ‘ढोल बजाकर लेना’ से क्या अभिप्राय है ?

(क) गाजे – बाजे के साथ कृष्ण से प्रेम संबंध स्वीकारना | (ख) सार्वजनिक रूप से कृष्ण से प्रेम संबंध की घोषणा करना | (ग) नगाड़े पीटकर प्रेम की घोषणा करना | (घ) श्रीकृष्ण को खरीदने की खुशी में ढोल बजाना

(iii) ‘मुँहपो’ शब्द का अर्थ है -

(क) अंधेरा | (ख) महँगा | (ग) उलटा | (घ) अमूल्य

(iv) पद की भाषा में प्रधानता है -

(क) राजस्थानी शब्दों की | (ख) खड़ी बोली के शब्दों की | (ग) तत्सम शब्दों की | (घ) अवधी के शब्दों की

(v) श्रीकृष्ण को पाने के लिए मीरा ने क्या मूल्य चुकाया ?

(क) मान - सम्मान | (ख) धन - राशि | (ग) मणि - माणिक्य | (घ) सोना - चाँदी

(vi) काव्यांश के अनुरूप ‘छाणे’ शब्द का अर्थ है -

(क) छानकर | (ख) छिपकर | (ग) फैलकर | (घ) रुककर

(vii) कथन : मीरा श्रीकृष्ण से दर्शन देने की प्रार्थना कर रही है। | कारण : कृष्ण ने उन्हें पूर्वजन्म में दर्शन देने का वचन दिया था।

(घ) कथन तथा कारण दोनों सही हैं।
प्रमाणित उत्तर सारांश :

(i) (क) सोच-समझकर निर्णय लेना  |  (ii) (ख) सार्वजनिक रूप से कृष्ण से प्रेम संबंध की घोषणा करना  |  (iii) (ख) महँगा  |  (iv) (क) राजस्थानी शब्दों की  |  (v) (क) मान - सम्मान  |  (vi) (ख) छिपकर  |  (vii) (घ) कथन तथा कारण दोनों सही हैं।

Q. 24 (गद्यांश आधारित) [1 × 7 = 7 अंक]
कहते हैं, पर्वत शोभा निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्या ! पूर्व और अपर समुद्र – महोदधि और रत्नाकर दोनों को दोनों भुजाओं से थामता हुआ हिमालय पृथ्वी का ‘मानदंड’ कहा जाता तो गलत क्या है ? कालिदास ने ऐसा ही कहा था। इसी के पाद देश में यह श्रृंखला दूर तक लोटी हुई है, लोग इसे ‘शिवालिक श्रृंखला’ कहते हैं। ‘शिवालिक’ का क्या अर्थ है ? ‘शिवालिक’ या शिव के जटाजूट का निचला हिस्सा तो नहीं है ? लगता तो ऐसा ही है ? ‘सप्ताक्ष’ या सवा लाख की मालगुजारी वाला इलाका तो वह लगता नहीं ! शिव की लटियाई जटा ही इतनी सूखी, नीरस और कठोर हो सकती है। वैसे, अलकनंदा का स्रोत यहाँ से काफी दूरी पर है, लेकिन रहता तो अलग तो दूर-दूर तक छितराया ही रहता होगा।
(i) गद्यांश के लेखक हैं - (ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ii) गद्यांश के पाठ का नाम है - (घ) कुटज
(iii) हिमालय को पृथ्वी का मानदंड क्यों कहा गया है ? - (ख) दोनों समुद्रों के बीच थामे होने के कारण
(iv) गद्यांश में शिवालिक की छितराई श्रृंखलाओं को कहा गया है - (घ) भगवान शिव की जटाएँ
(v) लेखक ने शिवालिक श्रृंखला पर छितर जाने वाली वनस्पति की तुलना किसके साथ की है ? - (ख) शिव की जटाओं से
(vi) कथन : शिवालिक सवा लाख की मालगुजारी वाला इलाका है। | कारण : जल का स्रोत नहीं होने से यहाँ हरियाली का अभाव है। - (ख) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
(vii) पाठ में ‘स्रोत’ शब्द का अर्थ है - (क) उद्गम स्थल
प्रमाणित उत्तर सारांश :

(i) (ख) हजारी प्रसाद द्विवेदी  |  (ii) (घ) कुटज  |  (iii) (ख) दोनों समुद्रों के बीच थामे होने के कारण  |  (iv) (घ) भगवान शिव की जटाएँ  |  (v) (ख) शिव की जटाओं से  |  (vi) (ख) कारण सही है लेकिन कथन गलत है।  |  (vii) (क) उद्गम स्थल

Q. 25 व्यावहारिक हिंदी व्याकरण (Applied Grammar)
[1 × 10 = 10 अंक]

व्याकरण संबंधी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

(i) विलोम शब्द लिखिए : (क) जीवित   (ख) शुष्क
(क) जीवित  — मृत (अथवा अजीवित)
(ख) शुष्क  — आर्द्र (अथवा सरस)
(ii) उपसर्ग / प्रत्यय अलग कीजिए : (क) अवमानना   (ख) ऐतिहासिक
(क) अवमानना  — उपसर्ग : अव + मूल शब्द : मानना
(ख) ऐतिहासिक  — मूल शब्द : इतिहास + प्रत्यय : इक
(iii) विराम-चिह्न लगाइए : इस गिरिकूट बिहारी का नाम क्या है
शुद्ध विराम-चिह्न युक्त वाक्य : इस गिरिकूट-बिहारी का नाम क्या है?
(गिरिकूट-बिहारी में योजक चिह्न तथा वाक्य के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न ‘?’ लगेगा।)
(iv) वाक्य शुद्ध करके पुनः लिखिए : पेड़ में पक्षी चहचहा रहे हैं।
शुद्ध वाक्य : पेड़ पर पक्षी चहचहा रहे हैं।
(कारक संबंधी अशुद्धि : पेड़ की शाखाओं पर बैठने के अर्थ में अधिकरण कारक परसर्ग 'पर' प्रयुक्त होगा, 'में' नहीं।)
(v) सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए : नाम उस पद को कहते हैं, जिसे सामाजिक स्वीकृति प्राप्त हो।
सरल वाक्य : सामाजिक स्वीकृति प्राप्त पद को नाम कहते हैं।
(vi) ‘दाँत निपोरना’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
अर्थ : दीनतापूर्वक हँसना, लज्जित होकर गिड़गिड़ाना अथवा व्यर्थ हँसकर अपनी गलती छिपाना।
वाक्य-प्रयोग : जब प्रधानाचार्य जी ने मोहन से बिना अनुमति कक्षा से बाहर घूमने का कारण पूछा, तो वह अपनी गलती मानने के बजाय केवल दाँत निपोरने लगा।
(vii) संधि विच्छेद कीजिए : (क) उल्लास   (ख) गिरीश
(क) उल्लास = उत् + लास (व्यंजन संधि — त् के बाद ल आने पर त् का ल् हो जाता है)
(ख) गिरीश = गिरि + ईश (दीर्घ स्वर संधि — इ + ई = ई)
(viii) समास विग्रह करते हुए समास का नाम भी लिखिए : नीलोत्पल
समास विग्रह : नीला है जो उत्पल (कमल)
समास का नाम : कर्मधारय समास (जहाँ पूर्वपद 'नील' विशेषण तथा उत्तरपद 'उत्पल' विशेष्य है)
(ix) वाच्य भेद लिखिए : राम से चला नहीं जाता।
वाच्य भेद : भाववाच्य (यहाँ कर्ता के साथ 'से' करण कारक है, क्रिया अकर्मक है तथा असमर्थता का भाव प्रधान है)
(x) अर्थ की दृष्टि से वाक्य – भेद लिखिए : चुपचाप बैठ जाओ।
वाक्य भेद : आज्ञावाचक वाक्य (आदेशात्मक वाक्य)
खंड - ग

वर्णनात्मक प्रश्न (प्रश्न संख्या 26 से 34)

[कुल अंक : 50]
Q. 26 [4 अंक]

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(i) सोभित कर नवनीत लिए।
घुटुरनि चलत रेनु तन – मंडित, मुख दधि लेप किये।
चारु कपोल, लोल लोचन, गोरोचन – तिलक दिये।
लट – लटकनि मनु मत्त मधुप – गन मादक मधुर पिए।
कटुला – कंठ वक्ष केहरि – नख राजत रुचिर हिरे।
धन्य सूर एको पल इहिं सुख, का सत कल्प जिए।

Ans. (i) काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या :

प्रसंग : प्रस्तुत पद वात्सल्य रस के सम्राट महाकवि सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘बाल-लीला’ पद से उद्धृत है। इसमें कवि ने घुटनों के बल चलते हुए नटखट बालकृष्ण के अप्रतिम रूप-सौंदर्य और बाल-सुलभ चेष्टाओं का अत्यंत मनोहारी चित्र खींचा है।

व्याख्या : महाकवि सूरदास वर्णन करते हैं कि बालक श्रीकृष्ण अपने नन्हे-नन्हे हाथों में ताजा मक्खन (नवनीत) लिए हुए अत्यंत सुशोभित हो रहे हैं। वे आँगन में घुटनों के बल चल रहे हैं, जिससे उनका कोमल शरीर धूल-धूसरित (रेणु-मंडित) हो गया है और उनके सुंदर मुख पर दही का लेप लगा हुआ है। उनके दोनों गाल (कपोल) अत्यंत आकर्षक हैं, नेत्र चंचल हैं और ललाट पर गोरोचन का तिलक शोभा पा रहा है। उनके मुखड़े पर झूलती हुई बालों की लटें ऐसी प्रतीत होती हैं मानो भौरों का झुंड पराग रूपी मादक मधु पीकर मतवाला हो गया हो। उनके गले में कटुला (कंठहार) और वक्षःस्थल पर सिंह-नख (बाघ का नाखून) रूपी आभूषण हृदय पर अत्यंत सुंदर चमक बिखेर रहा है। सूरदास जी भावविभोर होकर कहते हैं कि बालक कृष्ण के इस अनुपम बाल-रूप के एक पल का भी दर्शन यदि प्राप्त हो जाए, तो जीवन धन्य हो जाता है; अन्यथा प्रभु-दर्शन के बिना सौ कल्पों तक जीवित रहने का भी कोई सार्थकता या मूल्य नहीं है।

काव्य-सौंदर्य : विशुद्ध वात्सल्य रस; गेय पद शैली; ब्रजभाषा का माधुर्य; 'लट-लटकनि मनु मत्त मधुप-गन' में उत्प्रेक्षा एवं अनुप्रास अलंकार।

अथवा (OR Alternative Fully Solved)

(ii) आँधियों नहीं जिसमें उमंग भरती हैं
छातियों जहाँ संगीत से भरती हैं
शोणित के बदले जहाँ अश्रु बहता है
वह देश कभी स्वाधीन नहीं रहता है।
पकड़ो अयाल, अन्धड़ पर उछल चढ़ो रे
किरिखों पर अपने तन का घाम मढ़ो रे!

Ans. (ii) वैकल्पिक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या :

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित प्रसिद्ध खंडकाव्य ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ से हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘परशुराम के उपदेश’ पाठ से संकलित है। यह कविता 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि में कायरता, निष्क्रियता और अति-अहिंसा की अकर्मण्यता को त्यागकर पौरुष, ओज और राष्ट्रीय स्वाभिमान जाग्रत करने का आह्वान करती है।

व्याख्या : कवि देशवासियों को ललकारते हुए कहते हैं कि जिस देश के नागरिकों के मन में जीवन के संघर्ष, विपदाओं और आंधियों को देखकर उत्साह व उमंग नहीं जगती, जहाँ अन्याय का प्रतिरोध करने के बजाय कायरतापूर्ण रुदन होता है और बलिदान के रक्त (शोणित) के स्थान पर कायरों की भाँति केवल आँसू बहाए जाते हैं, वह देश कभी भी स्वतंत्र और स्वाधीन नहीं रह सकता। स्वतंत्रता की रक्षा आँसुओं से नहीं, शौर्य और रक्त-तर्पण से होती है। अतः कवि युवाओं का आह्वान करते हैं कि उठो, प्रचंड तूफानी घोड़ों की गर्दन के बाल (अयाल) पकड़कर उस पर छलांग लगाकर सवार हो जाओ। विपरीत परिस्थितियों का सीना तानकर सामना करो और युद्धक्षेत्र में अपने शरीर का पसीना तथा पुरुषार्थ बहाकर देश की संप्रभुता की रक्षा करो।

काव्य-सौंदर्य : ओज गुण की प्रधानता; वीर रस का प्रखर प्रवाह; उद्बोधन एवं प्रेरणादायी शैली; खड़ी बोली का सशक्त व ओजस्वी प्रयोग।

Q. 27 [3 + 3 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखिए : (तीनों प्रश्न पूर्णतः हल किए गए हैं)

(क) पद्माकर रचित कविता के आधार पर गोपी की विवशता का वर्णन कीजिए : रीतिकालीन कवि पद्माकर के फाग-वर्णन के अनुसार, होली के पावन अवसर पर चंचल श्रीकृष्ण ने गोपी के ऊपर प्रेम और गुलाल का ऐसा गहरा रंग डाल दिया कि वह नख-शिख उसमें सराबोर हो गई। गोपी की आंतरिक विवशता यह है कि कृष्ण के प्रेम-रंग में रंग जाने के कारण वह लोक-लाज, कुल की मर्यादा और सास-ननद के भय से पूरी तरह असहाय हो चुकी है। वह उस रंगीन भीगे वस्त्र को जितना निचोड़ना चाहती है, कृष्ण के प्रेम का गहरा रंग उतना ही उसके मन और प्राणों में समाता जाता है। वह चाहकर भी अपने हृदय से कृष्ण के इस अनुराग-रूपी रंग को धो नहीं पाती और स्वयं को कृष्ण के प्रेम के सम्मुख पूर्णतः विवश पाती है।
(ख) ‘गज़ल’ कविता के संदर्भ में लिखिए कि कवि समाज में किस तरह का परिवर्तन लाना चाहता है ? दुष्यंत कुमार अपनी प्रसिद्ध जनवादी गज़ल “हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए” के माध्यम से व्यवस्था के जड़त्व, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, आम जनता की विवशता और शोषण के विरुद्ध एक बुनियादी सामाजिक व राजनीतिक क्रांति लाना चाहते हैं। कवि का स्पष्ट मानना है कि केवल सत्ता का चेहरा बदलना या झूठे आश्वासन देना काफी नहीं है, बल्कि उस अमानवीय व्यवस्था की नींव हिलनी चाहिए जिसने आम आदमी को पीड़ा में धकेल रखा है। वे समाज के शोषित वर्ग के सीने में विरोध की ऐसी ज्वाला धधकाना चाहते हैं, जिससे मानवीय अधिकारों, सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित एक नए शोषण-मुक्त समाज का निर्माण हो सके।
(ग) आपकी दृष्टि में संयुक्त परिवार अधिक बेहतर है या एकल परिवार, कारण सहित उत्तर दीजिए : मेरी दृष्टि में ‘संयुक्त परिवार’ एकल परिवार की तुलना में अधिक श्रेष्ठ, संतुलित और मानवीय है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :
1. संस्कार एवं संबल : संयुक्त परिवार में बच्चों को दादा-दादी के सान्निध्य में नैतिक मूल्य, त्याग और अनुशासन के संस्कार सहज ही मिलते हैं तथा कामकाजी माता-पिता के बच्चों में अकेलापन नहीं पनपता।
2. सुरक्षा एवं संकट में सहयोग : परिवार के किसी भी सदस्य पर आए आर्थिक, शारीरिक अथवा मानसिक संकट के समय पूरा परिवार एक ढाल बनकर खड़ा हो जाता है, जिससे तनाव बँट जाता है। यद्यपि एकल परिवार में निजता अधिक होती है, परंतु सामाजिक सुरक्षा और संस्कारों की दृष्टि से संयुक्त परिवार ही समाज की वास्तविक शक्ति है।
Q. 28 [1 × 5 = 5 अंक]
कम देकर, ज्यादा पाने की आदत बहुत बुरी है ;
तन का पूरा पड़ जाए, मन रीता रहता है !
कभी न चुकने वाला ऋण है, जीना बहुत कठिन है ;
यों मरने तक हर जीने वाला जीता रहता है !
आते हैं फल उन वृक्षों पर जो न उन्हें खाते हैं ;
छाँह जहाँ मिलती औरों को छत्र वहाँ छाते हैं ;
गाते हैं जो गीत, कभी अपने न गीत गाते हैं ;
हेम – हिमाचल कब्ज अपने हित – हिम – आतप रहता है !

(i) आदत एवं कारण : दूसरों को कम देकर उनसे अधिक-से-अधिक हड़पने की स्वार्थी प्रवृत्ति को बुरा कहा गया है, क्योंकि यह संकीर्ण भावना मनुष्य को आत्म-केंद्रित बना देती है और समाज में पारस्परिक प्रेम व त्याग समाप्त कर देती है।

(ii) ‘तन का पूरा पड़ जाए, मन रीता रहता है’ का आशय : भौतिक सुख-सुविधाओं से शरीर की आवश्यकताएँ पूरी होने पर भी त्याग, प्रेम और परोपकार के बिना अंतःकरण (मन) सदैव खाली, अतृप्त और अशांत बना रहता है।

(iii) वृक्षों का उपकार : वृक्ष स्वयं धूप सहकर दूसरों को शीतल छाया देने हेतु छत्र बन जाते हैं और अपने मीठे फल स्वयं न खाकर समस्त जीव-जगत को समर्पित कर देते हैं।

(iv) जीवन को ‘कभी न चुकने वाला ऋण’ क्यों कहा : मनुष्य प्रकृति और समाज से अनगिनत उपकार व संसाधन ग्रहण करता है, जिसकी भरपाई वह पूरे जीवन में कभी नहीं कर पाता; अतः सेवा करते हुए जीना अत्यंत कठिन तपस्या है।

(v) हिमालय का उदाहरण : सर्वोच्च परोपकार और निःस्वार्थ त्याग के प्रतीक रूप में दिया गया है। हिमालय प्रचंड शीत, बर्फ और सूर्य का कठोर ताप स्वयं अपनी छाती पर झेलकर सदियों से देश की रक्षा करता है और नदियाँ बहाकर सबको जीवन देता है।

Q. 29 [4 अंक]

निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए :
(i) हमारे शैशवकालीन अतीत और प्रत्यक्ष वर्तमान के बीच समय – प्रवाह का पाठ ज्यों – ज्यों चौड़ा होता जाता है त्यों – त्यों हमारी स्मृति में अनजाने में ही एक परिवर्तन लक्षित होने लगता है, शैशव की चित्रशाला के जिन चित्रों से हमारा रागात्मक संबंध गहरा होता है, उनकी रेखाएँ और रंग इतने स्पष्ट और चमकते होते चलते हैं कि हम वार्धक्य की धुँधली आँखों से भी उन्हें प्रत्यक्ष देखते रह सकते हैं। पर जिनसे ऐसा संबंध नहीं होता वे फीके होते – होते इस प्रकार स्मृति से धुल जाते हैं कि दूसरों के स्मरण दिलाने पर भी उनका स्मरण कठिन हो जाता है।

Ans. (i) गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या :

संदर्भ व प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश महादेवी वर्मा द्वारा रचित संस्मरण ‘सुभद्रा’ (स्मृति की रेखाएं) से उद्धृत है। इसमें लेखिका ने मानव मनोविज्ञान, काल-प्रवाह और स्मृतियों के स्थायी प्रभाव का अत्यंत सूक्ष्म, दार्शनिक और भावपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया है।

व्याख्या : लेखिका स्पष्ट करती हैं कि जैसे-जैसे मनुष्य की आयु बढ़ती है और बचपन के बीते हुए समय तथा वर्तमान के मध्य वर्षों का अंतराल (समय का पाट) विस्तृत होता जाता है, वैसे-वैसे हमारी स्मृति-पटल पर एक स्वाभाविक परिवर्तन घटित होता है। बाल्यावस्था की अनगिनत स्मृतियों में से जिन व्यक्तियों, घटनाओं या प्रसंगों के साथ हमारा आत्मिक, भावनात्मक व रागात्मक जुड़ाव गहरा होता है, वे स्मृतियाँ समय बीतने के साथ धुँधली नहीं होतीं; बल्कि उनके रंग और रेखाएँ और अधिक निखरकर स्पष्ट हो उठती हैं। वृद्धावस्था में आँखों की ज्योति क्षीण हो जाने पर भी वे आत्मीय स्मृतियाँ मन के पर्दे पर सजीव बनी रहती हैं। इसके विपरीत, जिन प्रसंगों से हमारा कोई भावनात्मक लगाव नहीं होता, वे समय के प्रवाह में धीरे-धीरे मिटते-मिटते पूरी तरह विस्मृत हो जाते हैं, जिन्हें दूसरों के बार-बार याद दिलाने पर भी हम याद नहीं कर पाते।

विशेष : मनोवैज्ञानिक यथार्थ का प्रांजल उद्घाटन; संस्कृतनिष्ठ, तत्समप्रधान एवं लालित्यपूर्ण गद्य शैली।

अथवा (OR Alternative Fully Solved)

(ii) देखो, हम तुम्हें किस तरह नहला – धुला कर पवित्र करते हैं (गंगा जल नहीं हुआ तो क्या हुआ, काला पानी तो है), और – अब तुम्हें उस लोक में भेजते हैं, जहाँ फाँसी नहीं होती कम – से – कम ‘अज़ादी’ सीख पड़ने पर फाँसी नहीं होती, जहाँ कोड़े नहीं लगाए जाते (नरक में जरूर लगाए जाते हैं, मगर अंडमान आने के बाद नरक जाने की जरूरत ही क्या?) जहाँ वह शरीर ही नहीं जिसे लटकाया जा सके।

Ans. (ii) वैकल्पिक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या :

संदर्भ व प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित यात्रा-संस्मरण ‘अंडमान डायरी’ से उद्धृत है। इसमें लेखक ने सेलुलर जेल (काला पानी) में स्वाधीनता सेनानियों पर ब्रिटिश हुकूमत द्वारा ढाए गए अमानवीय अत्याचारों, फाँसी की विभीषिका और औपनिवेशिक क्रूरता पर तीखा, मर्मभेदी व्यंग्य किया है।

व्याख्या : लेखक व्यंग्य के तीखे बाण चलाते हुए ब्रिटिश सत्ता की क्रूर मानसिकता को वाणी देते हैं। कारागार के जल्लाद कैदियों को मृत्यु-दंड देने से पूर्व स्नान कराने के पाखंड को पवित्रता का नाम देते हैं। लेखक कहते हैं कि यदि देशप्रेमियों को शुद्ध करने के लिए गंगाजल नहीं है, तो क्या हुआ, इस काल-कोठरी का खारा और यातनापूर्ण 'काला पानी' तो है ही। इसके बाद व्यंग्य करते हुए कहा गया है कि अब हम तुम्हें इस नश्वर संसार से उस परलोक में भेज रहे हैं, जहाँ कम-से-कम 'आजादी' का नारा लगाने पर फाँसी नहीं दी जाती, न ही कोड़े बरसाए जाते हैं। नरक की यातनाओं का उपहास उड़ाते हुए लेखक कहते हैं कि अंडमान की सेलुलर जेल का अमानवीय संताप भोग लेने के बाद अब किसी स्वतंत्रता सेनानी को अलग से नरक जाने की आवश्यकता ही कहाँ बची है! मृत्यु के बाद जब भौतिक शरीर ही नहीं रहेगा, तो ये क्रूर अंग्रेज उसे फाँसी के फंदे पर भला कैसे लटका पाएँगे!

विशेष : ब्रिटिश हुकूमत की नृशंसता पर मर्मघाती व्यंग्य; कोष्ठकों के भीतर सांकेतिक व मारक भाषा का अनूठा प्रयोग।

Q. 30 [3 + 3 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखिए : (तीनों प्रश्न पूर्णतः हल किए गए हैं)

(क) ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में क्या गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप दोनों को एक ही श्रेणी में रखा जा सकता है ? हाँ, बुनियादी पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और स्त्री के प्रति संकीर्ण सोच के आधार पर गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप दोनों को मूलतः एक ही श्रेणी में रखा जा सकता है, यद्यपि उनके तौर-तरीकों में थोड़ा बाह्य अंतर है। गोपाल प्रसाद जहाँ खुले तौर पर स्त्री-शिक्षा का विरोध करते हैं और विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हुए कम पढ़ी-लिखी, दब्बू बहू चाहते हैं; वहीं रामस्वरूप स्वयं को आधुनिक विचारों का पिता प्रदर्शित करते हुए भी पुत्री उमा की उच्च शिक्षा (बी.ए.) को छिपाते हैं और लड़के वालों के सामने उसे एक सजी-धजी वस्तु की भाँति प्रस्तुत करते हैं। दोनों ही कन्या के व्यक्तित्व, स्वाभिमान और स्वतंत्र अस्तित्व को नकारते हैं।
(ख) ‘चीफ की दावत’ कहानी में ‘माँ का क्या होगा’ संवाद पूरी कहानी का केंद्र है। इसकी पुष्टि कीजिए : ‘चीफ की दावत’ कहानी में ‘माँ का क्या होगा’ संवाद पूरी कहानी की धुरी और कथ्य का मूल केंद्र है। जब शामनाथ अपने अमेरिकी चीफ को प्रसन्न करने के लिए घर को सजाता है, तो उसकी सबसे बड़ी समस्या उसकी अपनी बूढ़ी, अनपढ़ माँ बन जाती है। वह अपनी माँ को एक फालतू कबाड़ की तरह कभी बरामदे में तो कभी पिछवाड़े छिपाने की योजना बनाता है ताकि आधुनिकता के दिखावे में कोई खलल न पड़े। किंतु विडंबना देखिए कि अंत में उसी सीधी-सादी माँ की फुलकारी और लोकगीत के दम पर शामनाथ को दफ्तर में पदोन्नति की उम्मीद जगती है। यह संवाद मध्यमवर्गीय संवेदनहीनता और स्वार्थ को उजागर करता है।
(ग) ‘पीढ़ियाँ और गिट्टियाँ’ पाठ में तरुणों ने वृद्धों को देवता क्यों बनाया ? हरिशंकर परसाई के अनुसार नई पीढ़ी के तरुणों ने वृद्धों को आदर देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें चतुराई से व्यावहारिक जीवन, अधिकारों और निर्णय लेने की सक्रिय भूमिका से पूरी तरह ‘निष्क्रिय व बेदखल’ करने के लिए ‘देवता’ की पदवी दे दी। जिस प्रकार मंदिर में स्थापित देवता केवल धूप-दीप और पूजा ग्रहण करता है, परंतु घर-गृहस्थी के वास्तविक कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता; उसी प्रकार तरुणों ने वृद्धों का आदर-सत्कार का ढोंग रचकर उन्हें पूज्य बना दिया ताकि वे चुपचाप एक कोने में पड़े रहें और नई पीढ़ी के निर्णयों में कोई दखल न दें।
Q. 31 [1 × 5 = 5 अंक]
देश प्रेम क्या है ? प्रेम ही तो है। बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता। इस प्रेम का आलंबन क्या है ? क्या सारा देश अर्थात मनुष्य, पशु – पक्षी, नदी – नाले, वन – पर्वत, सागर अर्थात सारी भूमि उसके सभी जीव – देश ही तो है। यह प्रेम किस प्रकार का है ? साहचर्यगत प्रेम है। जिनके बीच हम रहते हैं, जिन्हें हम रोज़ आँखों से देखते हैं, जिनकी बातें हम रोज़ सुनते हैं अर्थात जिनके साथिय के हम अभ्यासी हो जाते हैं। पशु और बालक भी जिनके साथ अधिक रहते हैं, उनसे चिपक जाते हैं। यह परिचय परिचय ही है और परिचय ही प्रेम का प्रवर्तक है। यदि प्रेम वास्तव में अन्तःकरण का कोई भाव है तो देश के स्वरूप से परिचित और अभ्यस्त हो जाइए।

बाहर निकलिए तो आँख खोलकर देखिए कि खेत कैसे लहलहा रहे हैं, नाले झाड़ियों के बीच कैसे बह रहे हैं, कछारों में चौपायों के झुंड इधर – उधर चरते हैं, चरवाहे तान लड़ा रहे हैं, उनमें घुलिए, देखिए तो क्या हो रहा है। जो मिले उनसे दो बातें कीजिए, इसलिए कि वे सब हमारे देश के हैं। इस प्रकार जब देश का रूप आपकी बुद्धि में समा जाएगा, आप उसके अंग-प्रत्यंग से परिचित हो जाएँगे, तब आपके अंतःकरण में इच्छा का सचमुच उदय होगा कि वह कभी न छूटे, वह सदा हरा – भरा और फला – फूले रहे, उसके धन धान्य की वृद्धि हो, उसके सभी प्राणी सुखी रहें।

(i) ‘परिचय’ का अभिप्राय : अपने परिवेश, देश की भूमि, प्रकृति और वहाँ रहने वाले समस्त मनुष्यों व जीवों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क, साहचर्य और आत्मीय जुड़ाव स्थापित करना। जैसे पशु और छोटे बच्चे भी निरंतर साथ रहने पर अपने पालक से सहज ही चिपक जाते हैं, वही घनिष्ठ साहचर्य ही सच्चा परिचय है।

(ii) परिचय को प्रेम का प्रवर्तक क्यों माना : बिना जाने-पहचाने किसी अज्ञात सत्ता से सच्चा अनुराग संभव नहीं है। जब हम किसी के साथ निरंतर रहते हैं और उसके स्वरूप से भली-भाँति अभ्यस्त हो जाते हैं, तब अंतःकरण में उसके प्रति स्वाभाविक आकर्षण व स्नेह उत्पन्न होता है; इसीलिए परिचय ही प्रेम का जन्मदाता व ‘प्रवर्तक’ है।

(iii) देश के स्वरूप से परिचित होने हेतु आवश्यक कार्य : मनुष्य को कमरों से बाहर निकलकर खुली आँखों से खेतों की लहलहाहट, कल-कल बहते नाले, कछारों में चरते पशुओं के झुंड तथा चरवाहों की तान देखनी होगी; प्रकृति में घुलना-मिलना होगा और मार्ग में मिलने वाले साधारण लोगों से आत्मीयता से दो बातें करनी होंगी।

(iv) मन में उत्पन्न मंगलमयी भावनाएँ : देश के अंग-प्रत्यंग से परिचित होने पर यह भावना जन्म लेती है कि हमारा देश हमसे कभी न छूटे, यह सदैव हरा-भरा और फला-फूला रहे, यहाँ धन-धान्य की नित्य वृद्धि हो तथा देश के समस्त प्राणी सुखी, निरोग और आनंदित रहें।

(v) उपयुक्त शीर्षक : सच्चा देशप्रेम और परिचय (अथवा देशप्रेम का वास्तविक स्वरूप)

Q. 32 [3 + 3 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखिए :

उत्तर : (क) राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भवनों की मरम्मत हेतु आधिकारिक टिप्पण (Official Noting) :

प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय, उत्तर प्रदेश
अनुभाग : भवन निर्माण एवं अनुरक्षण

विषय : राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवनों की मरम्मत एवं अनुरक्षण के संबंध में।

प्रधानाचार्य, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से प्राप्त पत्र संख्या रा.औ.प्र.सं./भवन/2026/142 दिनांक 12 सितंबर 2026 अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।

पत्र में अवगत कराया गया है कि संस्थान की मुख्य कार्यशाला, प्रयोगशालाओं एवं प्रशासनिक भवन की छतों से वर्षा ऋतु में जल टपकने तथा प्लास्टर टूटने के कारण प्रशिक्षण कार्य बाधित हो रहा है और विद्यार्थियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। संस्थान द्वारा लोक निर्माण विभाग (PWD) से तैयार कराया गया ₹8,50,000/- (रुपये आठ लाख पचास हजार मात्र) का प्राक्कलन (एस्टीमेट) भी संलग्न किया गया है।

उक्त कार्यशाला की तत्काल मरम्मत कराया जाना छात्र-हित व जनसुरक्षा की दृष्टि से नितांत आवश्यक है। चालू वित्तीय वर्ष में ‘संस्थान अनुरक्षण एवं मरम्मत मद’ में पर्याप्त बजट उपलब्ध है।

अतः प्रस्ताव अनुमोदनार्थ प्रस्तुत है ताकि लोक निर्माण विभाग को आवश्यक धनराशि जारी कर अविलंब कार्य प्रारंभ कराया जा सके।

हस्ताक्षर
(सुधीर कुमार)
समीक्षा अधिकारी
दिनांक : 24.09.2026
हस्ताक्षर
(उप निदेशक)
प्रशिक्षण एवं सेवायोजन
उत्तर : (ख) समाचार-पत्र के संपादक को पत्र :

सेवा में,
मुख्य संपादक महोदय,
दैनिक जागरण,
नई दिल्ली।

विषय : अस्पतालों में चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार एवं हिंसा की रोकथाम हेतु।

महोदय,

मैं आपके लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित दैनिक समाचार-पत्र के माध्यम से सरकार तथा समाज का ध्यान सरकारी व निजी अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ आए दिन होने वाली अशोभनीय हिंसा और दुर्व्यवहार की गंभीर घटनाओं की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।

चिकित्सक समाज में भगवान का दूसरा रूप माने जाते हैं जो सीमित संसाधनों और भारी तनाव के बीच चौबीसों घंटे रोगियों का जीवन बचाने का अथक प्रयास करते हैं। गंभीर स्थिति में किसी मरीज की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो जाने पर तीमारदारों द्वारा आक्रोशित होकर डॉक्टरों पर जानलेवा हमला करना, तोड़फोड़ करना और अभद्रता करना अत्यंत निंदनीय व अमानवीय है। इस प्रकार की असुरक्षा के कारण युवा चिकित्सकों का मनोबल टूटता है और संपूर्ण चिकित्सा व्यवस्था चरमरा जाती है।

अतः मेरा शासन-प्रशासन से पुरजोर अनुरोध है कि चिकित्सा संस्थानों में केंद्रीय सुरक्षा कानून का कड़ाई से पालन कराया जाए, अस्पतालों में पुख्ता सुरक्षा बल तैनात हों तथा हिंसा करने वाले उपद्रवियों पर गैर-जमानती धाराओं में त्वरित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि डॉक्टर जीवन रक्षक हैं, भाग्य विधाता नहीं।

धन्यवाद।

दिनांक : 26 सितंबर 2026 भवदीय,
आलोक शर्मा
जागरूक नागरिक, रोहिणी, नई दिल्ली
Q. 33 [3 + 3 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में दीजिए :

उत्तर : (क) साहित्यिक हिंदी की तीन प्रमुख विशेषताएँ : साहित्यिक हिंदी सामान्य बोलचाल की भाषा से भिन्न, परिष्कृत और कलात्मक होती है। इसकी तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
1. मानकता एवं समृद्ध शब्द-भंडार : साहित्यिक हिंदी व्याकरण सम्मत, सुगठित और मानक स्वरूप लिए होती है। इसमें तत्सम, तद्भव, देशज और आवश्यकतानुसार ग्रहण किए गए विविध भाषा-शैलियों के समृद्ध शब्दों का प्रयोग होता है।
2. लाक्षणिकता एवं व्यंजना शक्ति : यह भाषा केवल अभिधा (सीधे अर्थ) तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें बिंब, प्रतीक, अलंकार, मुहावरे तथा वक्रोक्ति के सहारे गूढ़, दार्शनिक और मार्मिक भावों को व्यक्त करने की अद्भुत व्यंजना शक्ति होती है।
3. भाव-गांभीर्य और सौंदर्यबोध : साहित्यिक हिंदी मानवीय अनुभूतियों, कल्पना, रस और सौंदर्य को संप्रेषित कर पाठक के हृदय में रसानुभूति और उच्च जीवन-मूल्य जाग्रत करने में सक्षम होती है।
उत्तर : (ख) संचार माध्यमों (Media) में प्रयुक्त भाषा के प्रयुक्ति क्षेत्र की विशेषताएँ : जनसंचार माध्यमों (प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं सोशल मीडिया) की भाषा का प्रयुक्ति क्षेत्र (रजिस्टर) जनसामान्य से जुड़ा होता है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
1. सरलता, सुगमता एवं सहजता : मीडिया की भाषा क्लिष्ट या दुरूह नहीं होती; यह आम जनता के दैनिक जीवन की बोलचाल के निकट होती है ताकि निरक्षर व अल्पशिक्षित व्यक्ति भी समाचार आसानी से समझ सके।
2. संक्षिप्तता, स्पष्टता एवं सटीकता : संचार भाषा में छोटे-छोटे, सुगठित वाक्य होते हैं। इसमें घुमावदार भाषा के स्थान पर वस्तुनिष्ठ, तथ्यात्मक और दो-टूक बात कही जाती है जिससे भ्रम की कोई गुंजाइश न रहे।
3. रोचकता एवं संप्रेषणीयता : समाचारों को आकर्षक बनाने के लिए भाषा में जीवंतता, गतिशीलता और समसामयिकता होती है तथा विभिन्न क्षेत्रों (खेल, राजनीति, विज्ञान, बाजार) की प्रचलित शब्दावली का स्वाभाविक प्रयोग होता है।
Q. 34 [4 + 4 = 8 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 80-100 शब्दों में लिखिए :

उत्तर : (क) बातचीत के उपकरण से न्यू मीडिया का प्रमुख संवाहक बनने की विकास-यात्रा :

प्रारंभ में मोबाइल फोन का आविष्कार केवल ताररहित (वायरलेस) बातचीत करने और संक्षिप्त संदेश (SMS) भेजने वाले एक व्यक्तिगत संचार उपकरण के रूप में हुआ था। किंतु 21वीं सदी में इंटरनेट क्रांति, डिजिटल अभिसरण (कन्वर्जेंस) और अत्याधुनिक स्मार्टफोन तकनीक के संगम ने मोबाइल फोन का कायाकल्प कर उसे ‘न्यू मीडिया’ (New Media) का सबसे शक्तिशाली, सर्वव्यापी और त्वरित संवाहक बना दिया है। इसके प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं :

  1. सूचना का सार्वभौमिक केंद्र : आज स्मार्टफोन केवल कॉलिंग डिवाइस नहीं है, बल्कि यह एक चलता-फिरता कंप्यूटर, टेलीविजन, रेडियो और पुस्तकालय है। हाई-स्पीड इंटरनेट (4G/5G) के माध्यम से देश-दुनिया की ताज़ा खबरें, ई-अखबार, पॉडकास्ट और वीडियो बुलेटिन सेकंडों में मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाते हैं।
  2. इंटरैक्टिव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स : यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि ऐप्स ने मोबाइल को दोतरफा संवाद का माध्यम बना दिया है। अब पाठक केवल मूक दर्शक नहीं है, बल्कि वह तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है, सर्वेक्षणों में भाग ले सकता है और अपना विचार साझा कर सकता है।
  3. सिटिजन जर्नलिज्म (नागरिक पत्रकारिता) : हाई-डेफिनिशन कैमरा, ऑडियो रिकॉर्डर और लाइव-स्ट्रीमिंग सुविधाओं ने आम नागरिक को भी पत्रकार बना दिया है। समाज में घटित होने वाली किसी भी घटना या भ्रष्टाचार का वीडियो बनाकर कोई भी व्यक्ति तुरंत इंटरनेट पर प्रसारित कर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना सकता है।
  4. सुविधा और पोर्टेबिलिटी : कहीं भी और कभी भी (Anytime, Anywhere) सूचना प्राप्त करने और साझा करने की अद्वितीय क्षमता ने मोबाइल फोन को न्यू मीडिया का हृदय और सबसे प्रभावी जनसंचार माध्यम बना दिया है।
उत्तर : (ख) टंकण (टाइपिंग) की परिभाषा एवं हिंदी में टंकण के प्रमुख प्रकार :

टंकण (टाइपिंग) की परिभाषा : किसी यांत्रिक टाइपराइटर अथवा कंप्यूटर के कीबोर्ड (कुंजीपटल) पर उंगलियों द्वारा कुंजियों (Keys) को दबाकर अक्षरों, अंकों और प्रतीकों को कागज अथवा कंप्यूटर स्क्रीन पर मुद्रित या अंकित करने की कला व विधा को ‘टंकण’ या ‘टाइपिंग’ कहते हैं। आधुनिक युग में कार्यालयी कार्यप्रणाली, ई-गवर्नेंस, प्रकाशन, मीडिया और डिजिटलीकरण के लिए कंप्यूटर टंकण एक अनिवार्य तकनीकी दक्षता है।

हिंदी में टंकण के प्रमुख प्रकार / कीबोर्ड लेआउट :
1. रेमिंगटन टाइपिंग (Remington Layout) : यह हिंदी टंकण की सबसे प्राचीन और पारंपरिक प्रणाली है, जो पुराने यांत्रिक टाइपराइटर के कीबोर्ड लेआउट पर आधारित है। न्यायालयों, सरकारी दफ्तरों और आशुलिपिकों (स्टेनोग्राफर्स) में आज भी इसका व्यापक उपयोग होता है। इसमें ‘कृतिदेव’ (Kruti Dev) और ‘चाणक्य’ जैसे नॉन-यूनिकोड फॉन्ट्स तथा यूनिकोड में 'रेमिंगटन गेल' या 'रेमिंगटन सीबीआई' कीबोर्ड लेआउट के माध्यम से टाइपिंग की जाती है। इसमें आधे अक्षर व मात्राओं के लिए विशिष्ट कुंजियाँ निर्धारित होती हैं।
2. इनस्क्रिप्ट टाइपिंग (Inscript Keyboard Layout) : भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (C-DAC) द्वारा भारतीय भाषाओं के लिए मानकीकृत किया गया यह आधिकारिक कीबोर्ड लेआउट है। यह पूरी तरह से देवनागरी वर्णमाला के ध्वन्यात्मक और वैज्ञानिक क्रम (बाएँ हाथ पर सभी स्वर तथा दाएँ हाथ पर सभी व्यंजन) पर आधारित है। यह यूनिकोड प्रणाली का मानक है और विंडोज, मैक तथा लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में इनबिल्ट उपलब्ध होता है। सरकारी परीक्षाओं में इनस्क्रिप्ट को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।
3. फोनेटिक / लिप्यंतरण टंकण (Phonetic / Transliteration Typing) : यह आज के डिजिटल युग में सबसे सरल, सहज और लोकप्रिय तरीका है। इसमें प्रयोक्ता अंग्रेजी (रोमन) लिपि में हिंदी के शब्दों का उच्चारण टाइप करता है और सॉफ्टवेयर उसे स्वतः शुद्ध देवनागरी में बदल देता है (जैसे अंग्रेजी में 'bharat' टाइप करने पर स्क्रीन पर 'भारत' लिखा जाता है)। 'गूगल इनपुट टूल्स' (Google Input Tools) और माइक्रोसॉफ्ट इंडिक आईएमई इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके लिए किसी विशेष औपचारिक टंकण प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।