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201
NIOS Secondary (Class 10) NIOS Syllabus / Paper Review

हिन्दी / Hindi (201)

Max Marks: 100
अधिकृत परीक्षा समाधान • प्रामाणिक आदर्श उत्तर-पुस्तिका

हिन्दी / Hindi (201)
सम्पूर्ण हल प्रश्न-पत्र (Complete Solved Paper)

एन.आई.ओ.एस. (NIOS) माध्यमिक पाठ्यक्रम (कक्षा 10) के अनुरूप शत-प्रतिशत प्रामाणिक समाधान। कुल 37 प्रश्नों का विश्लेषणात्मक हल, सभी वैकल्पिक प्रश्न ('अथवा' सहित), सप्रसंग व्याख्या, सार-संक्षेपण, औपचारिक व अनौपचारिक पत्र और निबंध लेखन का पूर्ण प्रारूप।

समय: 3 घण्टे पूर्णांक: 100 कुल प्रश्न: 37 Academic Audit: 100% Accurate
100/100 Scoring Target 37 Questions
खंड 'अ' (45 अंक)
व्याकरण (Q21-27)
सप्रसंग व्याख्या
सार, पत्र व निबंध

सामान्य अनुदेश एवं परीक्षा निर्देश (General Examination Instructions)

निर्देश तथा अंक-विभाजन योजना देखने हेतु क्लिक करें

सामान्य अनुदेश (Instructions for Candidates) :

  1. परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के पहले पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अवश्य लिखें।
  2. कृपया प्रश्न-पत्र को जाँच लें कि प्रश्न-पत्र के कुल पृष्ठों (11) तथा प्रश्नों (37) की उतनी ही संख्या है जितनी प्रथम पृष्ठ पर छपी है।
  3. उत्तर-पुस्तिका में पहचान-चिह्न बनाने अथवा निर्दिष्ट स्थानों के अतिरिक्त कहीं भी अनुक्रमांक लिखने पर परीक्षार्थी को अयोग्य ठहराया जाएगा।
  4. अपनी उत्तर-पुस्तिका पर प्रश्न-पत्र का कोड संख्या 71/S/201/A1 लिखें।
संरचना एवं अंक-विभाजन योजना
  • • खंड - 'अ' (प्रश्न 1 से 27): वस्तुनिष्ठ व बहुविकल्पीय प्रश्न (कुल अंक: 45)
    (पठित काव्यांश 1-5, अपठित काव्यांश 6, पठित गद्य 7-19, अपठित गद्यांश 20, व्याकरण 21-27)
  • • खंड - 'ब' (प्रश्न 28 से 37): विषयनिष्ठ व वर्णनात्मक प्रश्न (कुल अंक: 55)
    (पठित कविता 28-30, पठित गद्य 31-34, सार 35, पत्र 36, निबंध 37)
  • • कुल पूर्णांक: 100 अंक | सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
समय सारिणी एवं पठन निर्देश

प्रश्न-पत्र पठन अवधि: 15 मिनट (दोपहर 02:15 बजे से 02:30 बजे तक केवल प्रश्न-पत्र पढ़ने हेतु)।
लेखन अवधि: 3 घण्टे (दोपहर 02:30 बजे से 05:30 बजे तक उत्तर-पुस्तिका में लिखने हेतु)।

खंड - 'अ'

वस्तुनिष्ठ / बहुविकल्पीय प्रश्न (प्रश्न संख्या 1 से 27)

[पूर्णांक : 45 अंक]
Q. 01 पठित कविता • बूढ़ी पृथ्वी का दुख
[1 अंक]

'बूढ़ी पृथ्वी का दुख' कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है ताकि —

(क) कविता के सौन्दर्य-वर्णन में वृद्धि हो सके
(ख) प्रकृति तथा पृथ्वी के दुख का अहसास हो सके
(ग) लोग पृथ्वी के दुख को आपस में बाँटें
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
प्रमाणित उत्तर • विकल्प (ख) Audit: Confirmed

Ans. (ख) प्रकृति तथा पृथ्वी के दुख का अहसास हो सके
औचित्य / स्पष्टीकरण : कवयित्री निर्मला पुतुल ने इस कविता में पृथ्वी को एक वृद्ध स्त्री (बूढ़ी माँ) के रूप में चित्रित किया है ताकि मानव जाति अपने अंधाधुंध स्वार्थ, पेड़ों की कटाई और प्रदूषण से पीड़ित पृथ्वी के मर्म और वेदना को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सके और उसके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बने।

Q. 02 पठित कविता • रहीम के दोहे
[1 अंक]
पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन ।
अब दादुर बक्ता भए, हमको पूछत कौन ।।

रहीम के दोहे में दादुर ________ लोगों का प्रतीक है।

(क) ज्ञानी परन्तु कम बोलने वाले
(ख) ज्ञानी परन्तु बढ़-चढ़कर बोलने वाले
(ग) अज्ञानियों को महत्त्व देनेवाले
(घ) अज्ञानी और बढ़-चढ़कर बोलने वाले
Ans. (घ) अज्ञानी और बढ़-चढ़कर बोलने वाले

स्पष्टीकरण : 'दादुर' का शाब्दिक अर्थ मेंढक होता है। वर्षा ऋतु आने पर मेंढक निरंतर टर्राने लगते हैं और कोयल मौन साध लेती है। यहाँ कोयल विद्वान व गुणी व्यक्तियों की और दादुर अज्ञानी, वाचाल तथा बढ़-चढ़कर बोलने वाले मूर्खों के प्रतीक हैं।

Q. 03 पठित कविता • रिक्त स्थान पूर्ति
[1 × 3 = 3 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के रिक्त स्थान एक शब्द या वाक्यांश से भरिए और अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) आज़ादी की फ़सल को ________ ही काट सकता है।
(ख) 'चंद्रगहना से लौटती बेर' कविता में कवि को लगता है जैसे ________ का स्वयंवर हो रहा हो।
(ग) एक कवि के लिए आज़ादी का तात्पर्य ________ है।

(क) आज़ादी की फ़सल को मेहनत करने वाला / जो परिश्रम करता है (परिश्रमी) ही काट सकता है। (पाठ: 'आज़ादी')
(ख) 'चंद्रगहना से लौटती बेर' कविता में कवि को लगता है जैसे प्रकृति का स्वयंवर हो रहा हो।
(ग) एक कवि के लिए आज़ादी का तात्पर्य सच्चे अर्थों में अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत करना / शब्दों को अर्थ देना है।
Q. 04 पठित कविता • रिक्त स्थान पूर्ति
[1 × 2 = 2 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के रिक्त स्थान भरिए और अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) आह्वान कविता के अनुसार जीवन में सफलता पाने के लिए ________ की भावना त्यागकर ________ का पाठ पढ़ना पड़ता है।
(ख) कबीर के अनुसार गुरु ________ और शिष्य ________ के समान होता है।

(क) आह्वान कविता के अनुसार जीवन में सफलता पाने के लिए भाग्यवादिता (आलस्य) की भावना त्यागकर कर्म (पुरुषार्थ / परिश्रम) का पाठ पढ़ना पड़ता है।
(ख) कबीर के अनुसार गुरु कुम्हार और शिष्य मिट्टी के कच्चे घड़े (कुंभ) के समान होता है। ("गुरु कुम्हार सिष कुंभ है...")
Q. 05 पठित कविता • अलंकार व बोध
[1 × 2 = 2 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के रिक्त स्थान एक शब्द या वाक्यांश से भरकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) कवि वृंद ने मनुष्य की आँखों द्वारा उसके हृदय में विद्यमान हित या अहित के भाव को ________ उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया है, इसलिए यहाँ ________ अलंकार है।
(ख) 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख' कविता में कवयित्री ने ________ और ________ के स्वार्थ को मानव विरोधी भाव बताए हैं।

(क) कवि वृंद ने मनुष्य की आँखों द्वारा उसके हृदय में विद्यमान हित या अहित के भाव को निर्मल आरसी (स्वच्छ दर्पण / आईने) के उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया है, इसलिए यहाँ दृष्टांत अलंकार है।
(ख) 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख' कविता में कवयित्री ने लकड़ी काटने वालों (वन-तस्करों) और खनिज दोहन करने वालों (खनन-माफिया / अंधाधुंध भौतिक विकास) के स्वार्थ को मानव विरोधी भाव बताए हैं।
Q. 06 अपठित काव्यांश (Unseen Poetry Passage)
[4 × 1 = 4 अंक]
ऐसा दे दो दर्द मुझे तुम / मेरा गीत दीया बन जाए ।
मुरझा पाए न फसल कोई / ऐसी खाद बने इस तन की
किसी घर न दीपक बुझ पाए / ऐसी जलन जले इस मन की
भूखी सोए रात न कोई / प्यासी जागे सुबह न कोई
स्वर बरसे सावन आ जाए / रक्त गिरे, गेहूँ उग आए।
ऐसा दे दो दर्द मुझे तुम / मेरा गीत दीया बन जाए।
बहे पसीना जहाँ, वहाँ / हरयाने लगे नई हरियाली
गीत जहाँ गा आए, वहाँ / छा जाए सूरज की उजियाली
हँस दे प्यार जहाँ / मुसका दे मेरी मानव-ममता
चंदन हर मिट्टी हो जाए / नंदन हर बगिया बन जाए ।
ऐसा दर्द दे दो मुझे तुम / मेरा गीत दीया बन जाए ।

(क) 'मेरा गीत दीया बन जाए' कहकर कवि कहना चाहता है कि —

(i) उसके गीत दीपक समान सुंदर हों | (ii) उसके गीत लोगों के दुख रुपी अंधेरे को दूर करें और खुशी दें | (iii) गीतों को दीया बनाकर वह उसमें करुणा और संवेदना का तेल डाल सके | (iv) दर्द में डूबे उसके गीत पाठकों का मन बहला सकें

(ख) कवि अपने तन का प्रयोग इस प्रकार करना चाहता है —

(i) देश की सीमाओं की रक्षा के लिए | (ii) देश में नव क्रांति लाने के लिए | (iii) सभी के जीवन में खुशियाँ लाने के लिए | (iv) देश की मिट्टी में मिलकर खाद की तरह उसकी उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए

(ग) कवि हर बगिया को क्या बनाना चाहता है ?

(i) लहलहाते खेत | (ii) नन्दन | (iii) चन्दन | (iv) सावन

(घ) 'भूखी सोए रात न कोई, प्यासी जागे सुबह न कोई' में अलंकार है —

(i) मानवीकरण | (ii) उपमा | (iii) अनुप्रास | (iv) रूपक
प्रमाणित उत्तर सारांश :

(क) (ii) उसके गीत लोगों के दुख रुपी अंधेरे को दूर करें और खुशी दें।  |  (ख) (iv) देश की मिट्टी में मिलकर खाद की तरह उसकी उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए।  |  (ग) (ii) नन्दन ("नंदन हर बगिया बन जाए")  |  (घ) (i) मानवीकरण अलंकार (रात के भूखे सोने और सुबह के प्यासे जागने में अचेतन प्रकृति पर मानवीय क्रियाओं का आरोप)।

Q. 07 [1 अंक]

समाचार लिखने वाले अथवा प्रस्तुत करनेवाले संवाददाता के नाम को ___________ कहते हैं।

(क) बाइ लाइन
(ख) इन्ट्रो
(ग) कैप्शन
(घ) संपादकीय
Ans. (क) बाइ लाइन (Byline)

स्पष्टीकरण : पत्रकारिता में समाचार के ऊपर या नीचे लेखक/संवाददाता का जो नाम छपता है, उसे 'बाइ लाइन' कहा जाता है।

Q. 08 [1 अंक]

बहादुर की संवेदनशीलता का पता इस बात से लगता है कि ___________ ।

(क) वह सिल टूटने पर घर से भाग जाता है।
(ख) सभी के लिए दौड़-भाग कर काम करता है।
(ग) मारपीट का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(घ) झूठे आरोप लगने पर वह घर से भाग जाता है।
Ans. (घ) झूठे आरोप लगने पर वह घर से भाग जाता है।

स्पष्टीकरण : बहादुर मार-पीट और डाँट-फटकार सह लेता था, किन्तु जब रिश्तेदार द्वारा उस पर चोरी का झूठा लांछन लगाया गया और कथावाचक ने भी उस पर अविश्वास किया, तो उसका स्वाभिमान आहत हो गया और वह सब कुछ छोड़कर चला गया।

Q. 09 [1 अंक]

'नाखून क्यों बढ़ते हैं?' पाठ के अनुसार आर्यों के पास ऐसी कौन-सी दो चीज़ें थीं, जिनके कारण वे विजयी हुए?

(क) लोहे व हड्डियों के हथियार
(ख) लोहे के अस्त्र व घोड़े
(ग) वज्रास्त्र व घोड़े
(घ) पलीते वाली बंदूके व बम
Ans. (ख) लोहे के अस्त्र व घोड़े

स्पष्टीकरण : आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने स्पष्ट किया है कि आर्यों के पास लोहे के मजबूत अस्त्र-शस्त्र थे और उनके पास युद्ध में तीव्र गति प्रदान करने वाले घोड़े थे, जिसके बल पर वे विजयी हुए।

Q. 10 [1 अंक]

'शतरंज के खिलाड़ी' पाठ के अनुसार खून की एक भी बूँद गिरे बिना नवाब वाज़िदअली शाह की गिरफ्तारी किसका द्योतक है?

(क) अहिंसा का
(ख) वीरता का
(ग) शांति का
(घ) कायरता का
Ans. (घ) कायरता का

स्पष्टीकरण : मुंशी प्रेमचंद के अनुसार यह लखनऊ के शासकों और समाज की विलासिता, राजनीतिक पतन और कायरता का द्योतक था कि उनके नवाब को अंग्रेज़ बंदी बनाकर ले गए और पूरी सेना व जनता तमाशबीन बनी रही।

Q. 11 [1 अंक]

दूरदर्शन अधिकारी को लिखा जाने वाला पत्र किस प्रकार का होगा?

(क) व्यावसायिक पत्र
(ख) अनौपचारिक पत्र
(ग) आवेदन / प्रार्थना पत्र
(घ) कार्यालयी पत्र
Ans. (घ) कार्यालयी पत्र

स्पष्टीकरण : किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थान/अधिकारी को आधिकारिक कार्य, सुझाव या शिकायत हेतु भेजा जाने वाला पत्र 'कार्यालयी पत्र' (Official Letter) कहलाता है।

Q. 12 [1 अंक]

विस्तार से कही गई बात को कम शब्दों में व्यक्त करने को ___________ कहते हैं।

Ans. संक्षेपण (या सार-लेखन / Précis Writing)

स्पष्टीकरण : किसी विस्तृत गद्यांश, विचार अथवा वक्तव्य के मूल भावों को बनाए रखते हुए लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षिप्त रूप में लिखना संक्षेपण कहलाता है।

Q. 13 [1 अंक]

'अंधेर नगरी' नाटक में महंत ने ___________ को देखते हुए तुरंत नगर छोड़ने का निर्णय लिया।

Ans. 'टके सेर भाजी टके सेर खाजा' की अव्यवस्था / मूर्खतापूर्ण शासन व्यवस्था और विवेकहीनता

स्पष्टीकरण : महंत जी समझ गए थे कि जिस नगरी में गुण-दोष का कोई भेद नहीं है और भाजी व खाजा एक ही भाव बिकते हैं, उस अविवेकी शासन में कभी भी अकारण विपत्ति आ सकती है।

Q. 14 [2 × 1 = 2 अंक]

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
(क) सुखी राजकुमार कहानी में ईश्वर के द्वारा देवदूत को नगर की दो सबसे मूल्यवान वस्तुएँ लाने का आदेश देने पर देवदूत ___________ और ___________ ले आया।
(ख) 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' पाठ के लेखक ___________ हैं।

(क) देवदूत राजकुमार का सीसे का (फटा हुआ) दिल और मृत गौरेया (अबाबील पक्षी) ले आया।
(ख) 'नाखून क्यों बढ़ते हैं' पाठ के लेखक आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी हैं।
Q. 15 [2 × 1 = 2 अंक]

निम्नलिखित संवाद किस पात्र के हैं? पहचान कीजिए और रिक्त स्थान भरिए :
(क) "वाह रे, इसके पेट में तो लंबी दाढ़ी है।"
(ख) "जनाब, हीले न कीजिए। ये चकमे किसी और को दीजिएगा।"

(क) "वाह रे, इसके पेट में तो लंबी दाढ़ी है।" — उत्तर पात्र: निर्मला (कथावाचक की पत्नी) [पाठ: 'बहादुर']
(ख) "जनाब, हीले न कीजिए। ये चकमे किसी और को दीजिएगा।" — उत्तर पात्र: मीर रौशन अली (या मिर्ज़ा सज्जाद अली) [पाठ: 'शतरंज के खिलाड़ी']
Q. 16 [1 + 1 = 2 अंक]

नीचे दिए गए कथनों को उत्तर-पुस्तिका में लिखिए और बताइए कि वे सही हैं या गलत :
(क) निबंध के चार प्रमुख अंग होते हैं।
(ख) बहादुर द्वारा अपना सारा सामान कथावाचक के घर में छोड़कर चले जाना उसके स्वाभिमान को दर्शाता है।

(क) निबंध के चार प्रमुख अंग होते हैं।  — गलत (असत्य) (निबंध के मुख्य रूप से 3 अंग होते हैं: 1. प्रस्तावना/भूमिका, 2. मुख्य विषय-विस्तार, 3. उपसंहार/निष्कर्ष)
(ख) बहादुर द्वारा अपना सारा सामान कथावाचक के घर में छोड़कर चले जाना उसके स्वाभिमान को दर्शाता है।  — सही (सत्य)
Q. 17 [1 × 2 = 2 अंक]

'अंधेर नगरी' नाटक के पात्र राजा की दो चारित्रिक विशेषताएँ ___________ और ___________ हैं।

(क) कर्त्तव्यनिष्ठ और स्वकेन्द्रित
(ख) विवेकहीनता और आत्मकेन्द्रिकता
(ग) धार्मिक और कर्मठ
(घ) विवेकहीनता और संवेदनशीलता
Ans. (ख) विवेकहीनता और आत्मकेन्द्रिकता
Q. 18 [2 × 1 = 2 अंक]

नीचे दिए गए पाठों और पात्रों के सही युग्म चुनिए और उन्हें अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :

पाठ का नाम दिए गए पात्रों के नाम सही सुमेलित पात्र
सुखी राजकुमार बेगम, गोबरधनदास, मेयर मेयर
शतरंज के खिलाड़ी बेगम, गोबरधनदास, मेयर बेगम (मीर साहिब की बेगम)
टिप्पणी : 'गोबरधनदास' भारतेंदु हरिश्चंद्र रचित व्यंग्य नाटक 'अंधेर नगरी' का प्रसिद्ध पात्र है।
Q. 19 [2 × 1 = 2 अंक]

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
(क) फ़ोटो के नीचे दी गई सूचना को अखबार की भाषा में ___________ कहते हैं।
(ख) अनौपचारिक पत्र लेखन में संबोधन के तुरंत बाद उस व्यक्ति को संबोधन के ही अनुरूप ___________ लिखना होता है।

(क) फ़ोटो के नीचे दी गई सूचना को अखबार की भाषा में कैप्शन (Caption / चित्र-परिचय) कहते हैं।
(ख) अनौपचारिक पत्र लेखन में संबोधन के तुरंत बाद उस व्यक्ति को संबोधन के ही अनुरूप अभिवादन (जैसे: सादर प्रणाम, चरण स्पर्श, सप्रेम नमस्ते आदि) लिखना होता है।
Q. 20 अपठित गद्यांश (Unseen Prose Passage) [4 × 1 = 4 अंक]
जब लोग त्रस्त हों, पराजित हों या शोकग्रस्त हों तभी उन्हे हमारी सहानुभूति, सहायता या प्रोत्साहन की ज़रूरत होती है। उस समय उनका आत्मविश्वास लड़खड़ा जाता है। उस समय उनकी खिल्ली उड़ाने का या उनकी परेशानी का मज़ा लूटने का मोह हमें रोकना चाहिए तथा उन्हें सहारा देना चाहिए। उनकी हिम्मत बढ़ानी चाहिए। जो ऐसा करते हैं, वे उनके हृदय में हमेशा के लिए स्थान प्राप्त कर लेते हैं, अपनी लोकप्रियता की परिधि विस्तृत करते हैं। दूसरों के सुख-दुख में सच्चे अन्तःकरण से दिलचस्पी लेना अच्छे संस्कार का लक्षण तो है ही, साथ ही व्यवहार-कुशलता भी है, जो लोगों को हमारी ओर आकर्षित करती है। हाँ, इसमें दिखावा, बनावटीपन और ऊपरी-ऊपरी शिष्टाचार नहीं होना चाहिए। जो भावना सच्ची होती है, हृदय से निकलती है, वही हृदय को बाँध भी सकती है। मानव की दो मूल प्रवृत्तियाँ होती हैं। एक तो यह कि लोग हमारे गुणों की कद्र करें, हमें दाद दें और हमारा आदर करें और दूसरे वे हम से प्रेम करें, हमारा अभाव महसूस करें, उनके जीवन में हम कुछ महत्त्व रखते हैं — ऐसा अनुभव करें।

(क) लोगों को हमारी सहानुभूति की सबसे अधिक आवश्यकता कब होती है?

(i) जब जीवन की परिस्थितियाँ उनके अनुकूल हों | (ii) जिस समय वे लोकप्रिय हो जाएँ | (iii) जिस समय उनका आत्मविश्वास लड़खड़ा जाए | (iv) जब वे त्रस्त, शोकग्रस्त और पराजित न हों

(ख) किस प्रकार के लोग दूसरों के दिलों में जगह बना लेते हैं?

(i) जो दूसरों की खिल्ली उड़ाते हैं | (ii) जो दूसरों की परेशानी का मज़ा लूटते हों | (iii) जो लोगों को लुभाने के लिए झूठे वादे करते हों | (iv) जो दूसरों की भावनाओं को समझकर उनकी हिम्मत बढ़ाते हों

(ग) व्यवहार-कुशलता का लक्षण है —

(i) दूसरों की भावनाएँ जान-समझकर भी चुप रहना | (ii) दूसरों के सुख-दुख में साथ देना | (iii) लोकप्रियता के लिए अवसरानुकूल आचरण करना | (iv) दिखावा, बनावटीपन और ऊपरी शिष्टाचार

(घ) प्रत्येक मनुष्य चाहता है —

(i) शिष्टाचार का पालन करना और दिखावा | (ii) अपने गुणों की कद्र व दूसरों का प्रेम पाना | (iii) बनावटीपन दिखाकर दूसरों का प्रेम हासिल करना | (iv) दूसरों को पराजित व शोकग्रस्त देखना
प्रमाणित उत्तर सारांश :

(क) (iii) जिस समय उनका आत्मविश्वास लड़खड़ा जाए।  |  (ख) (iv) जो दूसरों की भावनाओं को समझकर उनकी हिम्मत बढ़ाते हों।  |  (ग) (ii) दूसरों के सुख-दुख में साथ देना।  |  (घ) (ii) अपने गुणों की कद्र व दूसरों का प्रेम पाना।

Q. 21 व्याकरण • मुहावरे
[1 अंक]

'फ़िरकी की तरह नाचना' मुहावरे का अर्थ है —

(i) एक खिलौना
(ii) काम करने के लिए इधर से उधर दौड़ते फिरना
(iii) बहुत तेज़ दौड़ना
(iv) नृत्य-कला में कुशल होना
Ans. (ii) काम करने के लिए इधर से उधर दौड़ते फिरना

स्पष्टीकरण : काम की अधिकता के कारण लगातार चक्कर काटते रहना या किसी के इशारे पर अत्यंत व्यस्त रहना।

Q. 22 व्याकरण • समास पहचान
[1 अंक]

'आनंद-महल' में ___________ समास है।

(i) अव्ययीभाव
(ii) द्वन्द्व
(iii) तत्पुरुष
(iv) बहुव्रीहि
Ans. (iii) तत्पुरुष समास

समास-विग्रह : आनंद का महल (सम्बन्ध तत्पुरुष समास — जहाँ उत्तर पद प्रधान हो और सम्बन्ध कारक विभक्ति 'का' का लोप हुआ हो)।

Q. 23 व्याकरण • वाक्य-शुद्धि
[1 अंक]

निम्नलिखित वाक्यों में शुद्ध वाक्य है —

(i) दिल्ली में देखने योग्य कई दर्शनीय स्थान हैं।
(ii) दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थान हैं।
(iii) दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थान देखने योग्य हैं।
(iv) दिल्ली में हैं अनेकों दर्शनीय स्थान।
Ans. (ii) दिल्ली में अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

त्रुटि विश्लेषण : (i) व (iii) में 'दर्शनीय' (जिसका अर्थ ही है 'देखने योग्य') के साथ 'देखने योग्य' की पुनरुक्ति अशुद्धि है; (iv) में 'अनेकों' अशुद्ध बहुवचन है ('अनेक' स्वयं बहुवचन है)। अतः (ii) सर्वथा शुद्ध वाक्य है।

Q. 24 व्याकरण • रचना की दृष्टि से वाक्य-भेद
[1 अंक]

'जब दरवाज़ा बंद हुआ, तो समझ गए, बेगम साहिबा बिगड़ गईं।' यह एक ___________ वाक्य है।

(i) संयुक्त
(ii) विधानवाचक
(iii) मिश्र
(iv) सरल
Ans. (iii) मिश्र वाक्य

स्पष्टीकरण : यहाँ 'जब... तो...' योजक से एक प्रधान उपवाक्य और एक आश्रित क्रिया-विशेषण उपवाक्य परस्पर जुड़े हैं, अतः यह मिश्र (मिश्रित) वाक्य है।

Q. 25 व्याकरण • संधि-विच्छेद
[2 × 1 = 2 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(i) 'वार्तालाप' का संधि-विच्छेद है ।
(ii) 'अत्यधिक' का संधि विच्छेद ___________ है।

(i) 'वार्तालाप' = वार्ता + आलाप (दीर्घ स्वर संधि : आ + आ = आ)
(ii) 'अत्यधिक' = अति + अधिक (यण् स्वर संधि : इ + अ = य्)
Q. 26 व्याकरण • उपसर्ग व प्रत्यय
[2 × 1 = 2 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(i) 'राष्ट्रीय' शब्द में ___________ प्रत्यय है।
(ii) 'अपमान' शब्द में ___________ उपसर्ग है।

(i) 'राष्ट्रीय' शब्द में ईय प्रत्यय है। (मूल शब्द: राष्ट्र + प्रत्यय: ईय)
(ii) 'अपमान' शब्द में अप उपसर्ग है। (उपसर्ग: अप + मूल शब्द: मान)
Q. 27 व्याकरण • तत्सम व तद्भव शब्द
[2 × 1 = 2 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(i) मयूर, जिह्वा, सूरज और दधि में से ___________ तद्भव शब्द है।
(ii) कंगन, गाँव, दाँत और दुग्ध में से ___________ तत्सम शब्द है।

(i) मयूर, जिह्वा, सूरज और दधि में से सूरज तद्भव शब्द है। (इसका तत्सम रूप 'सूर्य' है; शेष तीनों तत्सम हैं)
(ii) कंगन, गाँव, दाँत और दुग्ध में से दुग्ध तत्सम शब्द है। (इसका तद्भव रूप 'दूध' है; शेष तीनों तद्भव हैं)
खंड - 'ब'

विषयनिष्ठ / वर्णनात्मक प्रश्न (प्रश्न संख्या 28 से 37)

[पूर्णांक : 55 अंक]
Q. 28 पठित काव्यांश • काव्य-सौन्दर्य स्पष्टीकरण
[4 अंक]

निम्नलिखित काव्यांश के कवि और कविता का नामोल्लेख करते हुए काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए :

खैर, खून, खाँसी, खुसी, वैर, प्रीति, मदपान ।
रहिमन दाबे न दबें, जानत सकल जहान ।।
उत्तर (प्रथम विकल्प) :

1. कवि एवं कविता का नाम : कवि — अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) | कविता — 'दोहे'

2. भाव-सौंदर्य : कवि रहीम अपने लोक-अनुभव के आधार पर स्पष्ट करते हैं कि जीवन की सात बातें — खैर (कुशल-क्षेम), खून (हत्या/अपराध), खाँसी (रोग), खुसी (हर्ष/आनंद), वैर (शत्रुता), प्रीति (प्रेम) और मदपान (मदिरा का नशा) — ऐसे तत्व हैं जिन्हें लाख छिपाने का प्रयास किया जाए, वे कभी छिप नहीं सकते। संसार का यह शाश्वत सत्य है कि मनुष्य की आंतरिक मनोदशा और उसके वास्तविक कर्म किसी-न-किसी रूप में प्रकट हो ही जाते हैं।

3. शिल्प-सौंदर्य :
• छंद : पारंपरिक 'दोहा' छंद (मात्रिक छंद — प्रथम व तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ)।
• अलंकार : 'खैर, खून, खाँसी, खुसी' में 'ख' वर्ण की आवृत्ति तथा 'दाबे न दबें' में 'द' वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार की सुंदर छटा है।
• भाषा व शैली : सहज, स्वाभाविक अवधी व ब्रज मिश्रित जनभाषा; उपदेशात्मक व सूक्तिपरक शैली तथा प्रसाद गुण।

अथवा (OR Alternative Fully Solved)
फाग गाता मास फागुन
आ गया है आज जैसे ।
देखता हूँ मैं : स्वयंवर हो रहा है
प्रकृति का अनुराग अंचल हिल रहा है
इस विजन में
दूर व्यापारिक नगर से
प्रेम की प्रिय भूमि उपजाऊ अधिक है।
उत्तर (वैकल्पिक काव्यांश) :

1. कवि एवं कविता का नाम : कवि — केदारनाथ अग्रवाल | कविता — 'चंद्रगहना से लौटती बेर'

2. भाव-सौंदर्य : कवि गाँव के शांत, प्राकृतिक परिवेश की तुलना स्वार्थ-प्रेरित शहरी व्यवसायिकता से करते हुए कहते हैं कि फागुन मास मस्ती भरा फाग गाता हुआ उपस्थित प्रतीत होता है। चारों ओर खेतों और खलिहानों के रूप-रंग को देखकर लगता है मानो प्रकृति रूपी सुंदरी का स्वयंवर हो रहा हो। कवि यह गहरा सामाजिक सत्य उद्घाटित करते हैं कि स्वार्थ और लालच से भरे व्यापारिक नगरों की तुलना में गाँव की निर्जन और शांत भूमि में परस्पर प्रेम, मानवीय आत्मीयता और संवेदनशीलता अधिक फलती-फूलती है।

3. शिल्प-सौंदर्य :
• अलंकार : 'फाग गाता मास फागुन' और 'प्रकृति का अनुराग अंचल हिल रहा है' में मानवीकरण अलंकार; 'अनुराग अंचल' में रूपक अलंकार; 'फाग गाता... फागुन' में 'फ' की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार।
• रस व बिम्ब : शृंगार रस (संयोग शृंगार) तथा अत्यंत सजीव व मनोहारी दृश्य बिम्ब।
• भाषा व छंद : आधुनिक मुक्त छंद; सरस, चित्रात्मक एवं सहज खड़ी बोली।

Q. 29 पठित काव्यांश • सप्रसंग व्याख्या
[3 अंक]

निम्नलिखित अवतरण की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

सुना है कभी
रात के सन्नाटे में अँधेरे से मुँह ढाँप
किस कदर रोती हैं नदियाँ ?
इस घाट अपने कपड़े और मवेशी धोते
सोचा है कभी कि उस घाट
पी रहा होगा कोई प्यासा पानी
या कोई स्त्री चढ़ा रही होगी
किसी देवता को अर्घ्य ?
सप्रसंग व्याख्या (प्रथम विकल्प) :

संदर्भ : प्रस्तुत काव्यांश पाठ्यपुस्तक के पाठ 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख' से उद्धृत है। इसकी कवयित्री निर्मला पुतुल हैं।

प्रसंग : कवयित्री ने इन पंक्तियों में मनुष्य द्वारा नदियों के जल को निरंतर प्रदूषित किए जाने और जलस्रोतों के प्रति उसकी चरम संवेदनहीनता पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है।

व्याख्या : कवयित्री आत्म-केन्द्रित मनुष्यों से तीखा प्रश्न करती हैं कि क्या कभी किसी ने रात के गहरे सन्नाटे में नदियों के अव्यक्त रुदन को महसूस किया है? नदियाँ मनुष्य द्वारा की जा रही अपनी दुर्दशा पर अंधकार में मुँह छिपाकर मानो फूट-फूटकर रोती हैं। मनुष्य इतना स्वार्थी हो गया है कि वह नदी के एक घाट पर अपने गंदे कपड़े धोता है, पशुओं को नहलाकर जल को गंदा करता है, और एक क्षण के लिए भी यह नहीं सोचता कि उसी समय दूसरे घाट पर कोई प्यासा मनुष्य अपनी प्यास बुझा रहा होगा या कोई धर्मपरायण स्त्री उसी जल से देवताओं को पवित्र अर्घ्य अर्पित कर रही होगी। मनुष्य की यह असंवेदनशीलता संपूर्ण पर्यावरण के लिए विनाशकारी है।

विशेष : नदी के रोने की कल्पना में सशक्त मानवीकरण अलंकार; प्रश्नात्मक व चेतना जगाने वाली भाषा-शैली।

अथवा (OR Alternative Fully Solved)
गुरु कुम्हार सिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़े खोट ।
अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट ।।
सप्रसंग व्याख्या (वैकल्पिक दोहा) :

संदर्भ : प्रस्तुत साखी ज्ञानमार्गी संत काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि संत कबीरदास द्वारा रचित साखियों से अवतरित है।

प्रसंग : कबीरदास जी ने इस साखी में सद्गुरु की महिमा तथा शिष्य के निर्माण में गुरु के कठोर अनुशासन और आंतरिक स्नेह के संतुलन का सुंदर वर्णन किया है।

व्याख्या : कबीरदास जी कहते हैं कि सद्गुरु एक कुशल कुम्हार के समान होते हैं और शिष्य मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होता है। जिस प्रकार कुम्हार घड़ा बनाते समय भीतर से एक हाथ का सहारा देता रहता है और बाहर से थापी से उस पर चोट मारकर उसकी सारी विकृतियाँ और कमियाँ दूर कर उसे सुडौल और उपयोगी बनाता है; ठीक उसी प्रकार गुरु भी शिष्य के हृदय को भीतर से अपने अपार प्रेम, करुणा और सुरक्षा का संबल देते हैं, जबकि बाहर से कठोर अनुशासन, डाँट-फटकार और परीक्षा रूपी चोट देकर उसके दोषों, बुराइयों और अज्ञान को बाहर निकालकर उसे एक श्रेष्ठ और संस्कारवान मनुष्य बनाते हैं।

विशेष : सांगरूपक व दृष्टांत अलंकार (गुरु = कुम्हार, शिष्य = घड़ा); सधुक्कड़ी भाषा का प्रवाह एवं गेयता।

Q. 30 पठित कविता • लघूत्तरीय प्रश्न (20-25 शब्द)
[3 × 2 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर 20 से 25 शब्दों में लिखिए : (सभी चार प्रश्न संपूर्ण हल सहित)

(क) 'आह्वान' कविता के कवि के अनुसार राष्ट्र के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार राष्ट्र-विकास हेतु दो प्रमुख बिंदु हैं :
1. भाग्य और ईश्वर के भरोसे निष्क्रिय बैठने (भाग्यवादिता) का त्याग कर निरंतर कठिन परिश्रम और कर्मशीलता (पुरुषार्थ) को अपनाना।
2. परस्पर भेदभाव, संकीर्ण वैमनस्य और आलस्य को छोड़कर संगठित होकर आपसी एकता व सहयोग से आगे बढ़ना।
(ख) "आज़ादी" कविता के अंत में शागिर्द को क्या समझ में आ गया और उसने क्या किया? शागिर्द को अंत में समझ आ गया कि आज़ादी केवल निष्क्रिय कल्पना या आलस्य नहीं है, बल्कि परिश्रम, कर्तव्यपालन और कर्म की निरंतरता ही वास्तविक स्वतंत्रता है। इसलिए उसने तुरंत बिना किसी संशय के अपनी सुई में धागा पिरोया और निष्ठापूर्वक कपड़े सीने के काम में जुट गया।
(ग) कबीर सुरा भरे स्वर्ण-कलश का उदाहरण देकर क्या स्पष्ट करना चाहते हैं? कबीरदास जी कहते हैं कि सोने के कलश में यदि मदिरा (सुरा) भरी हो, तो भी साधुजन उसकी निंदा ही करते हैं। इस उदाहरण द्वारा वे स्पष्ट करते हैं कि उच्च कुल या प्रतिष्ठित वंश में जन्म लेने मात्र से कोई महान नहीं बनता; मनुष्य केवल अपने सद्कर्मों, आचरण और चरित्र की श्रेष्ठता से ही आदरणीय होता है।
(घ) 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख' कविता के आधार पर प्रकृति के प्रति मनुष्य के कर्त्तव्य स्पष्ट कीजिए। मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अंधाधुंध स्वार्थवश पेड़ों की कटाई और पहाड़ों-खनिजों का अनियंत्रित दोहन बंद करे। नदियों व वायु को प्रदूषित होने से बचाए तथा प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु न समझकर अपनी जन्मदात्री माँ के समान उसके प्रति संवेदना, प्रेम और संरक्षण का भाव रखे।
Q. 31 पठित गद्य • लघूत्तरीय प्रश्न (20-25 शब्द)
[3 × 2 = 6 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर 20 से 25 शब्दों में लिखिए : (सभी चार प्रश्न संपूर्ण हल सहित)

(क) 'सुखी राजकुमार' कहानी में बच्चों के प्रति गौरेया के दृष्टिकोण में क्या परिवर्तन आता है व क्यों? प्रारंभ में गौरेया बच्चों से चिढ़ती थी क्योंकि कुछ शरारती लड़कों ने उस पर पत्थर फेंके थे। किन्तु जब उसने ठंड और भूख से तड़पते गरीब बच्चों की बेबसी देखी और राजकुमार के कहने पर उनके पास सोना व रत्न पहुँचाए, तो उनके हँसते-खिलखिलाते चेहरे देखकर उसका हृदय वात्सल्य और अपार करुणा से भर गया।
(ख) 'अंधेर नगरी' नाटक में नाटककार महंत के चरित्र द्वारा क्या संदेश देना चाहता है? भारतेंदु हरिश्चंद्र महंत के चरित्र के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि जहाँ न्याय-अन्याय में कोई अंतर न हो और शासन विवेकहीन हो, वहाँ लालच में पड़कर नहीं रुकना चाहिए। संकट के समय केवल विवेक, दूरदर्शिता और बुद्धि-चातुर्य ही जीवन की रक्षा कर सकते हैं।
(ग) 'शतरंज के खिलाड़ी' कहानी आज भी प्रासंगिक कैसे है? यह कहानी आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह चेतावनी देती है कि जब नागरिक या राष्ट्र-नायक व्यक्तिगत स्वार्थ, विलासिता और तुच्छ मनोरंजन में लिप्त होकर अपने सामाजिक व राष्ट्रीय कर्तव्यों को भूल जाते हैं, तो देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता संकट में पड़ जाती है।
(घ) लेखक के अनुसार नाखूनों का बढ़ना और उन्हे काटना किसकी निशानी है? लेखक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार नाखूनों का निरंतर बढ़ना मनुष्य की जन्मजात पशुता (पाशविक वृत्ति) की निशानी है, जबकि उन्हें काटना और संवारना मनुष्य की मानवता, आत्म-नियंत्रण और संस्कृति की निशानी है।
Q. 32 पठित गद्य व पत्र-कौशल (20-25 शब्द)
[2 × 2 = 4 अंक]

निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर 20 से 25 शब्दों में लिखिए : (सभी तीन प्रश्न संपूर्ण हल सहित)

(क) 'बहादुर' कहानी में कथावाचक का पछतावा महत्त्वपूर्ण क्यों है? कथावाचक का पछतावा इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह मध्यमवर्गीय समाज की आत्म-समीक्षा और अंतरात्मा की जागृति को दर्शाता है। इससे सिद्ध होता है कि वे बहादुर की ईमानदारी, सेवा-भाव और स्वाभिमान की कद्र न कर सके और उनके मन में एक निर्दोष बच्चे के प्रति अपराध-बोध की टीस रह गई।
(ख) सुखी राजकुमार कहानी के अंत में ईश्वर ने राजकुमार के दिल और गौरेया को कहाँ स्थान दिया? ईश्वर ने उन दोनों को अपने स्वर्ग के सबसे पावन स्थान में रखा। ईश्वर ने घोषणा की कि गौरेया उनके स्वर्ग के बगीचे में सदा मधुर गीत गाएगी और सुखी राजकुमार उनके सोने के शहर में सदा उनकी स्तुति व वास करेगा।
(ग) पारिवारिक पत्रों की प्रमुख विशेषता स्पष्ट कीजिए। पारिवारिक (अनौपचारिक) पत्रों की प्रमुख विशेषता आत्मीयता, सहजता और हार्दिक स्नेह की अभिव्यक्ति है। इनमें किसी औपचारिक भाषा या बनावटी शिष्टाचार के स्थान पर सरल, आत्मीय भाषा में सुख-दुख व कुशल-क्षेम साझा की जाती है।
Q. 33 पठित गद्यांश आधारित प्रश्न
[5 अंक]

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

"दोनों दोस्तों ने कमर से तलवारें निकाल लीं। नवाबी ज़माना था; सभी तलवार, पेशकब्ज़, कटार वगैरह बाँधते थे। दोनों विलासी थे, पर कायर न थे। उनमें राजनीतिक भावों का अधः पतन हो गया था बादशाह के लिए, बादशाहत के लिए क्यों मरें; पर व्यक्तिगत वीरता का अभाव न था। दोनों ज़ख्म खाकर गिरे और दोनों ने वहीं तड़प - तड़प कर जाने दे दीं।"
उत्तर (प्रथम गद्यांश) :
(क) पाठ और लेखक का नाम :
पाठ का नाम : शतरंज के खिलाड़ी  |  लेखक का नाम : मुंशी प्रेमचंद
(ख) 'दोनों' कहकर किन्हें संबोधित किया जा रहा है? उन्होंने तलवारें क्यों निकाल लीं?
'दोनों' कहकर लखनऊ के दो जागीरदार मित्रों — मिर्ज़ा सज्जाद अली और मीर रौशन अली को संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने तलवारें इसलिए निकाल लीं क्योंकि वे एकांत खंडहर में बैठकर शतरंज खेल रहे थे और खेल के दौरान मोहरों की बाज़ी व चाल को लेकर दोनों में तीखा विवाद हो गया। बात बढ़ते-बढ़ते खानदानी प्रतिष्ठा, तानों और झूठे व्यक्तिगत अहंकार के टकराव तक पहुँच गई, जिसके कारण दोनों ने कमर से तलवारें खींच लीं।
(ग) सिद्ध कीजिए कि दोनों में राजनीतिक भावों का अधःपतन हो गया था।
राजनीतिक भावों का अधःपतन इस बात से प्रत्यक्ष सिद्ध होता है कि जिस समय उनके देश, राज्य और नवाब वाज़िदअली शाह पर अंग्रेज़ों की सेना ने कब्ज़ा कर लिया और उनके बादशाह को बंदी बनाकर ले जाया जा रहा था, उस समय इन दोनों के मन में अपने देश या राजा की रक्षा के लिए लड़ने का रंचमात्र भी विचार नहीं आया। वे कहते रहे कि "बादशाह के लिए हम क्यों अपनी जान दें?" किन्तु शतरंज के एक साधारण खेल में झूठी व्यक्तिगत आन-बान पर दोनों ने एक-दूसरे की जान ले ली। यह उनके पूर्ण राजनीतिक व राष्ट्रीय संवेदनहीनता का अकाट्य प्रमाण है।
अथवा (OR Alternative Fully Solved)
"अरे, वह सब झूठ है। मैं तो पहले ही जानती थी कि वे लोग बच्चों को कुछ देना नहीं चाहते, इसलिए अपनी गलती और लाज छिपाने के लिए यह प्रपंच रच रहे हैं। उन लोगों को क्या मैं जानती नहीं? कभी उनके पैसे रास्ते में गुम हो जाते हैं, कभी वे गलती से घर पर ही छोड़ आते हैं। मेरे कलेजे में तो जैसे कुछ हौंड़ रहा है। किशोर को भी बड़ा अफ़सोस है।"
उत्तर (वैकल्पिक गद्यांश) :
(क) पाठ व लेखक का नाम :
पाठ का नाम : बहादुर  |  लेखक का नाम : अमरकांत
(ख) गद्यांश में लेखक की पत्नी किनकी बात कर रही है व क्यों?
लेखक की पत्नी निर्मला अपने घर आए उन रिश्तेदारों (साले साहब और उनकी पत्नी) की बात कर रही है, जिन्होंने घर आकर ग्यारह रुपये खो जाने का बहाना बनाया था और बहादुर पर चोरी का झूठा आरोप लगाया था। जब बहादुर घर छोड़कर चला गया और अपना सारा सामान तथा कपड़े तक छोड़ गया, तब निर्मला को अपनी भूल और उन रिश्तेदारों के झूठे प्रपंच की असलियत समझ में आई।
(ग) किशोर को किस बात का अफ़सोस है?
लेखक के पुत्र किशोर को इस बात का गहरा अफ़सोस और पश्चाताप है कि उसने बहादुर पर हाथ उठाया था और उसे अकारण डाँटा-मारा था। उसे दुख है कि वह बहादुर जैसे निष्ठावान, परिश्रमी और सीधे-सादे बालक के स्वाभिमान को न समझ सका और अब वह सदा के लिए उन्हें छोड़कर चला गया।
Q. 34 पठित गद्य • सप्रसंग व्याख्या
[5 अंक]

निम्नलिखित अवतरण की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

"नख-धर मनुष्य एटम बम पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है। पर उसके नाखून अब भी बढ़ रहे हैं। अब भी प्रकृति मनुष्य को उसके भीतर वाले अस्त्र से वंचित नहीं कर रही है। आज भी वह याद दिला देती है कि तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता । तुम वही लाखों वर्ष पहले के नखदंता वलंबी जीव हो पशु के साथ एक ही सतह पर विचरनेवाले, चरने वाले ।"
सप्रसंग व्याख्या (प्रथम अवतरण) :

1. संदर्भ : प्रस्तुत गद्यांश ललित निबंध 'नाखून क्यों बढ़ते हैं?' से उद्धृत है। इसके रचयिता मानवतावादी विचारक आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी हैं।

2. प्रसंग : लेखक ने आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक के बल पर संहारक हथियारों (परमाणु बम) की होड़ में लगे मनुष्य की पाशविक वृत्ति पर तीखा व्यंग्य करते हुए प्रकृति द्वारा उसकी आदिम हिंसक प्रवृत्तियों की याद दिलाने का वर्णन किया है।

3. व्याख्या : लेखक कहते हैं कि आज का मनुष्य अत्यंत शक्तिशाली एटम बम और आधुनिक घातक अस्त्र-शस्त्रों के अहंकार पर सवार होकर सभ्यता के विकास का दावा कर रहा है। किन्तु प्रकृति आज भी उसके शरीर पर नाखूनों को लगातार बढ़ाकर यह चेतावनी देती है कि उसने अपने आदिम हिंसक स्वभाव को अभी तक त्यागा नहीं है। प्रकृति मनुष्य को उसके मूल प्राकृतिक अस्त्र (नाखूनों) से वंचित नहीं होने देती। वह मानो मनुष्य को आईना दिखाते हुए सचेत करती है कि हे मानव! तुम चाहे कितने भी आधुनिक वैज्ञानिक बन जाओ, तुम्हारा मूल वही लाखों वर्ष पुराना आदिम जंगली जानवर है, जो अपने नाखूनों और दाँतों पर निर्भर रहकर जंगलों में जानवरों के साथ विचरण करता था। केवल हथियारों का रूप बदला है—पहले जो क्रूरता नाखूनों में थी, आज वही पाशविक हिंसा एटम बम के रूप में प्रकट हो रही है। यदि मनुष्य ने अपने भीतर प्रेम, करुणा और त्याग की भावना नहीं बढ़ाई, तो वह आज भी वस्तुतः पशु ही है।

4. विशेष : संहारक अस्त्रों की होड़ पर मारक व्यंग्य; तत्समप्रधान, वैचारिक तथा दार्शनिक गद्य शैली।

अथवा (OR Alternative Fully Solved)
"ऐसी नगरी में रहना उचित नहीं है, जहाँ टके सेर भाजी और टके ही सेर खाजा हो। ऐसी अंधेर नगरी में हज़ार मन मिठाई मुफ़्त की मिले, तो किस काम की? यहाँ एक छन नहीं रहना है।"
सप्रसंग व्याख्या (वैकल्पिक अवतरण) :

1. संदर्भ : प्रस्तुत संवाद आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित प्रसिद्ध व्यंग्य नाटक 'अंधेर नगरी' के दूसरे अंक से लिया गया है।

2. प्रसंग : जब महंत जी को उनका शिष्य गोवर्धनदास बताता है कि इस नगर में सब कुछ—सब्जी (भाजी) से लेकर मूल्यवान मिठाई (खाजा)—एक ही भाव 'टके सेर' बिकता है, तब महंत जी उस नगर के अविवेक और अन्याय को भाँपकर तुरंत नगर छोड़ने का निर्णय लेते हैं।

3. व्याख्या : महंत जी एक ज्ञानी और दूरदर्शी संत हैं। वे अपने लोभी शिष्य गोवर्धनदास को समझाते हुए दृढ़तापूर्वक कहते हैं कि जिस राज्य में गुण और अवगुण, ज्ञान और अज्ञान, सड़ी-गली भाजी और स्वादिष्ट कीमती खाजा दोनों को एक ही तराजू पर तौला जाता हो, उस राज्य में एक क्षण भी निवास करना सर्वथा अनुचित और आत्मघाती है। जहाँ योग्यता और अयोग्यता में भेद करने की समझ शासक में न हो, उस अंधेर नगरी में यदि कोई मन-भर (सैकड़ों किलो) मिठाई मुफ्त में भी दे, तो वह किसी काम की नहीं है क्योंकि ऐसा अविवेकी और अन्यायपूर्ण वातावरण अंततः विनाश का ही कारण बनता है। इसलिए वे तुरंत उस स्थान को छोड़ देने का संकल्प लेते हैं।

4. विशेष : लोभ के दुष्परिणाम और अविवेकी सत्ता के संकट पर सटीक व्यंग्य; महंत की दूरदर्शिता का उद्घाटन।

लेखन कौशल

सार-लेखन, पत्र एवं निबंध (प्रश्न संख्या 35 से 37)

[कुल अंक : 17]
Q. 35 संक्षेपण / सार-लेखन (एक-तिहाई शब्दों में)
[5 अंक]

निम्नलिखित गद्यांश का सार एक-तिहाई शब्दों में लिखिए :

"आशा का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होना आवश्यक है। मानव को निराशा के अंधकार को चीरकर निरंतर कर्मशील बनकर आशा के प्रकाश की ओर बढ़ते रहना चाहिए। अपने ध्येय की ओर पहुँचने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। आशा के बल पर मानव जीवन एक रमणीय उपवन बन जाता है। आशावादी व्यक्ति के जीवन में आनेवाली प्रतिकूल परिस्थितियाँ भी वरदान बन जाती हैं। वह धैर्य का संबल पाकर पर्वत के समान भारी दुखों को सहज रूप से उठा लेता है। जीवन में सफलता असफलता, हानि-लाभ, जय-पराजय, आशा-निराशा तो धूप छाँह की तरह आती – जाती हैं। मानव का गुण है - उत्साह एवं आत्मविश्वास । मनुष्य का हताश और निराश होकर बैठ जाना उसकी क्षमताओं, योग्यताओं तथा आत्मविश्वास का अपमान है। सच्चा मनुष्य वही है, जो संकट काल में धैर्य न छोड़े । दुख में घबराना कायरता का प्रतीक है। उसका सामना करना मनुष्य का कर्त्तव्य है।"
सार-लेखन का आदर्श प्रारूप :

उपयुक्त शीर्षक : जीवन में आशा और कर्मशीलता का महत्त्व (अथवा : आशावादिता और आत्मविश्वास)

मानव जीवन में आशा का संचार परम आवश्यक है। सुख-दुख, जय-पराजय जीवन के स्वाभाविक अंग हैं। आशावादी व्यक्ति धैर्य, उत्साह और आत्मविश्वास के बल पर भीषण संकटों व प्रतिकूल परिस्थितियों का भी सहजता से सामना कर लेता है। निराशा में हाथ पर हाथ धरकर बैठना अपनी योग्यताओं का अपमान और कायरता है, जबकि संकट के समय धैर्यपूर्वक निरंतर कर्मशील बने रहना ही सच्चे मनुष्य का परम धर्म है।
• मूल गद्यांश के कुल शब्द : लगभग 140 शब्द • संक्षेपण शब्द संख्या : 50 शब्द (यथावत एक-तिहाई)
Q. 36 पत्र-लेखन (अनौपचारिक / औपचारिक)
[5 अंक]

छात्रावास में रहने वाले अपने अस्वस्थ मित्र को ढांढ़स बँधाकर उसका मनोबल बढ़ाते हुए पत्र लिखिए।

उत्तर (प्रथम विकल्प - अनौपचारिक पत्र) :

कमरा संख्या: 42, यमुना छात्रावास,
राजकीय विद्यालय परिसर,
नई दिल्ली — 110001
दिनांक: 15 अक्टूबर 2024

प्रिय मित्र रोहन,
सप्रेम नमस्ते।

कल ही मुझे तुम्हारे सहपाठी सुमित के पत्र से यह ज्ञात हुआ कि तुम पिछले कुछ दिनों से तीव्र मौसमी ज्वर (बुखार) से अस्वस्थ हो और छात्रावास के चिकित्सा-कक्ष में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हो। यह समाचार जानकर मन अत्यंत चिंतित हो गया।

मेरे प्रिय मित्र, मैं जानता हूँ कि परीक्षाएँ निकट हैं और ऐसे समय में बीमारी के कारण पढ़ाई में व्यवधान आना मन को व्यथित करता है। किन्तु तुम्हें बिल्कुल भी निराश या हतोत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। इस समय तुम्हारी पहली प्राथमिकता तुम्हारा स्वास्थ्य है। चिकित्सक द्वारा दी गई औषधियों का समय पर सेवन करना, पौष्टिक व सुपाच्य भोजन लेना और पर्याप्त विश्राम करना। किसी भी बात की मानसिक चिंता मत करना।

जहाँ तक छूटी हुई पढ़ाई और कक्षाओं के नोट्स की बात है, तुम बिल्कुल आश्वस्त रहो। मैंने सभी विषयों के महत्वपूर्ण नोट्स तैयार कर लिए हैं। तुम्हारे पूरी तरह स्वस्थ होते ही हम दोनों साथ बैठकर सारा पाठ्यक्रम आसानी से पूरा कर लेंगे। तुम स्वभाव से बहुत साहसी और कर्मठ हो; अतः सकारात्मक सोच बनाए रखो और अपना मनोबल ऊँचा रखो।

यदि तुम्हें किसी भी वस्तु या सहयोग की आवश्यकता हो, तो मुझे तुरंत सूचित करना, मैं शीघ्र ही तुमसे मिलने छात्रावास आऊँगा। ईश्वर से तुम्हारे अतिशीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,
हर्षित शर्मा

अथवा (OR Alternative Fully Solved)

आपको अपने क्षेत्र के कुछ लोगों की गतिविधियों पर संदेह है। इसकी सूचना देते हुए व त्वरित छान-बीन करने का अनुरोध करते हुए क्षेत्रीय थानाध्यक्ष को पत्र लिखिए।

उत्तर (वैकल्पिक पत्र - औपचारिक / शिकायती पत्र) :

सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
थाना: सिविल लाइन्स,
उत्तरी-पश्चिमी जिला, दिल्ली — 110054

विषय : क्षेत्र में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की अवांछित गतिविधियों की सूचना एवं त्वरित छान-बीन हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं विकास नगर, गली संख्या-4, सिविल लाइन्स क्षेत्र का एक जागरूक एवं स्थायी निवासी हूँ। मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान अपने मुहल्ले में घटित हो रही कुछ अत्यंत संदिग्ध और असामान्य गतिविधियों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

विगत दो सप्ताह से हमारे क्षेत्र के एक पुराने खाली पड़े मकान (मकान नं. 112/बी) के आसपास देर रात 11 बजे से 3 बजे के बीच कुछ अज्ञात युवकों का जमावड़ा देखा जा रहा है। ये लोग बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों और कारों से आते हैं और संदेहास्पद पैकेटों का आदान-प्रदान करते हैं। अनजान और अजनबी होने के साथ-साथ उनका आचरण मुहल्ले के शांत वातावरण को बिगाड़ रहा है और क्षेत्रवासियों में किसी बड़ी आपराधिक घटना, चोरी अथवा मादक पदार्थों की तस्करी की गंभीर आशंका उत्पन्न कर रहा है। महिलाओं और वृद्धों का शाम के बाद घर से निकलना भययुक्त हो गया है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि जनसुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए हमारे क्षेत्र में रात्रि पुलिस गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए तथा उक्त संदिग्ध व्यक्तियों एवं गतिविधियों की गुप्त व त्वरित छान-बीन कर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी अप्रिय दुर्घटना से पूर्व क्षेत्र की शांति व सुरक्षा बहाल हो सके।

इस त्वरित सहयोग हेतु संपूर्ण क्षेत्रवासी आपके अत्यंत आभारी रहेंगे।

सधन्यवाद।

दिनांक : 15 अक्टूबर 2024 भवदीय,
आलोक कुमार
(अध्यक्ष, विकास नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन)
मोबाईल : 98765XXXXX
Q. 37 [7 अंक]

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए :

(क) विश्व में सुधरती भारत की छवि (संपूर्ण निबंध नीचे प्रस्तुत)
(ख) जो तोकू काँटा बुवै, ताहि बोय तू फूल
(ग) मुड़ो प्रकृति की ओर, बढ़ो मनुष्यता की ओर
(घ) मेरा प्रिय कवि

विषय (क) : विश्व में सुधरती भारत की छवि

शब्द संख्या : ~350 शब्द | आदर्श एवं प्रामाणिक निबंध
रूपरेखा (संकेत बिंदु) :
  1. प्रस्तावना: प्राचीन गौरव से आधुनिक पुनरुत्थान तक
  2. आर्थिक सुदृढ़ता और तकनीकी आत्मनिर्भरता
  3. वैश्विक कूटनीति और नेतृत्वकारी भूमिका (विश्व-बंधुत्व)
  4. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव (सॉफ्ट पावर)
  5. उपसंहार: सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
1. प्रस्तावना :

भारत विश्व की प्राचीनतम और समृद्धतम सभ्यताओं का उद्गम स्थल रहा है। इसे कभी 'सोने की चिड़िया' और 'विश्वगुरु' की संज्ञा दी जाती थी। यद्यपि मध्यकाल और औपनिवेशिक दासता के लंबे कालखंड ने भारत की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ को क्षति पहुँचाई, किंतु 21वीं सदी के तीसरे दशक में भारत ने वैश्विक पटल पर जिस द्रुत गति से अपनी सशक्त, आधुनिक और स्वाभिमानी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने संपूर्ण विश्व का दृष्टिकोण बदल दिया है। आज भारत को केवल एक विकासशील देश नहीं, अपितु एक वैश्विक महाशक्ति, निर्णायक नीति-निर्माता और संकटमोचक राष्ट्र के रूप में देखा जा रहा है।

2. आर्थिक शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता :

वर्तमान में भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीव्र गति से तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी योजनाओं ने भारत को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बना दिया है। यूपीआई (UPI) के माध्यम से डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में भारत आज समूचे विश्व का नेतृत्व कर रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान में 'चंद्रयान-3' की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सफल लैंडिंग और 'आदित्य-एल1' की यात्रा ने भारत के स्वदेशी वैज्ञानिक सामर्थ्य का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया है।

3. वैश्विक कूटनीति और शांतिदूत की भूमिका :

कूटनीतिक दृष्टि से भारत आज एक स्वतंत्र और संप्रभु विदेश नीति का सफल संवाहक है। जी-20 (G-20) शिखर सम्मेलन की अभूतपूर्व और सर्वसमावेशी अध्यक्षता ने सिद्ध कर दिया कि भारत वैश्विक मतभेदों के बीच सहमति का सेतु बनाने में सक्षम है। भारत ने अफ़्रीकी संघ को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाकर 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की बुलंद आवाज़ बनकर सबका विश्वास जीता। कोरोना महामारी के कठिन दौर में 'वैक्सीन मैत्री' अभियान चलाकर लगभग 100 से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीके और दवाइयाँ पहुँचाकर भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अपने शाश्वत सिद्धांत को सप्रमाण सिद्ध किया। तुर्किये और सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप में 'ऑपरेशन दोस्त' के जरिए त्वरित मानवीय सहायता भेजकर भारत ने वैश्विक स्तर पर मानवता की मिसाल पेश की।

4. सांस्कृतिक प्रभुत्व (सॉफ्ट पावर) :

भारत की सुधरती छवि में उसकी सांस्कृतिक विरासत का अप्रतिम योगदान है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया जाना और दुनिया के कोने-कोने में योग व आयुर्वेद को जीवनशैली के रूप में स्वीकार किया जाना भारत की अगाध सांस्कृतिक विजय है। भारतीय दर्शन, संगीत, सिनेमा और खान-पान आज वैश्विक आकर्षण के केंद्र बन चुके हैं।

5. उपसंहार :

निष्कर्षतः आज का भारत आत्मविश्वास से परिपूर्ण, आत्मनिर्भर और विश्व-कल्याण के लिए समर्पित एक सशक्त राष्ट्र है। अपनी सामरिक शक्ति, आर्थिक स्थिरता, कूटनीतिक संतुलन और नैतिक नेतृत्व के बल पर भारत 'विश्वमित्र' के रूप में अपनी अमिट पहचान स्थापित कर चुका है। यदि हम इसी समर्पण और कर्मठता से प्रगति के पथ पर बढ़ते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुनः अपने परम वैभव को प्राप्त कर विश्वगुरु के पद पर आसीन होगा।

अन्य तीनों वैकल्पिक निबंधों की संपूर्ण रूपरेखा व केंद्रीय विचार :
विषय (ख) : जो तोकू काँटा बुवै, ताहि बोय तू फूल

संकेत बिंदु : सूक्ति का मर्म (बुराई का बदला भलाई से देना) | बदले की भावना से समाज में हिंसा की वृद्धि | महापुरुषों (कबीर, बुद्ध, गांधी, ईसा मसीह) का क्षमाशील दर्शन | प्रेम और अहिंसा द्वारा शत्रु के हृदय-परिवर्तन का चमत्कार | उपसंहार: क्षमाशीलता ही मानवता का सर्वोच्च भूषण है।

विषय (ग) : मुड़ो प्रकृति की ओर, बढ़ो मनुष्यता की ओर

संकेत बिंदु : आधुनिक भौतिकतावादी अंधी दौड़ और पर्यावरण संकट | प्रकृति से विमुख होने के दुष्परिणाम (ग्लोबल वॉर्मिंग, प्रदूषण, महामारियाँ) | प्रकृति और मानवीय मूल्यों का गहरा अंतर्संबंध | सतत एवं संतुलित जीवनशैली (Sustainable Living) की अनिवार्यता | उपसंहार: प्रकृति की रक्षा ही मानव अस्तित्व की रक्षा है।

विषय (घ) : मेरा प्रिय कवि (गोस्वामी तुलसीदास / कबीरदास / निराला)

संकेत बिंदु : कवि का संक्षिप्त जीवन-परिचय | प्रमुख अमर कृतियाँ | प्रिय होने के कारण (काव्यगत विशेषताएँ, जनकल्याणकारी दृष्टिकोण, उच्च जीवन-मूल्य) | भाषा-शैली, रस व अलंकारों का सजीव प्रयोग | साहित्य व समाज में उनका योगदान व सार्वकालिक प्रासंगिकता।